पराली जलाई तो मिट्टी भी जलेगी, प्रदूषण भी बढ़ेगाः डीसी सतबीर सिंह
फसल अवशेष खेत में मिलाएं, अगली फसल के लिए बनेगा जैविक आधार
रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सतबीर सिंह ने किसानों से फसल अवशेष जलाने के बजाय उनका वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पराली अपशिष्ट नहीं, बल्कि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर और जैविक कार्बन जैसे पोषक तत्वों का स्रोत है, जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और अन्य ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है। इससे वायु प्रदूषण के साथ मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव भी नष्ट होते हैं और उसकी जल ग्रहण क्षमता प्रभावित होती है।
डीसी ने कहा कि किसान हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन, स्ट्रॉ चॉपर, रोटावेटर, बेलर और रीपर जैसे कृषि यंत्रों से अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हैं। इन्हें मिट्टी में मिलाने से नमी और जैविक पदार्थ बढ़ता है तथा अगली फसल में सिंचाई और उर्वरक की जरूरत कम हो सकती है। अवशेषों से खाद, पशुचारा, बायोगैस और बायोमास ऊर्जा भी तैयार की जा सकती है।
कृषि विभाग द्वारा इन मशीनों की खरीद पर निर्धारित योजनाओं के तहत सब्सिडी दी जाती है। गांव सीसर खास में जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को भी जागरूक किया गया।
उपायुक्त ने चेतावनी दी कि पराली जलाने पर 2,500 से 15,000 रुपये तक जुर्माना और नियमों के उल्लंघन पर पुलिस कार्रवाई हो सकती है।

Girish Saini 

