एफडीपी में फैकल्टी की संस्थागत नेतृत्व भूमिका पर मंथन

एफडीपी में फैकल्टी की संस्थागत नेतृत्व भूमिका पर मंथन

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू में जारी फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) के चौथे दिन फ्रॉम टीचिंग एंड रिसर्च टू इंस्टीट्यूशनल लीडरशिप: फैकल्टी एज पार्टनर्स इन स्ट्रेटेजिक गवर्नेंस एंड कंट्रीब्युटर्स टू यूनिवर्सिटी ट्रांसफॉर्मेशन पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।

रैफल्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आर.एस. सांगवान ने कहा कि फैकल्टी की भूमिका केवल शिक्षण और शोध तक सीमित नहीं है। अकादमिक ज्ञान, व्यावसायिक अनुभव और संस्थागत सहभागिता के माध्यम से शिक्षक विश्वविद्यालयों में सकारात्मक बदलाव के महत्वपूर्ण वाहक बन सकते हैं। उन्होंने अंतर्विषयक सहयोग, नवाचारपूर्ण शिक्षण, उद्योग से जुड़ाव और उभरती चुनौतियों के प्रभावी समाधान को संस्थागत परिवर्तन के लिए जरूरी बताया।

ग्राफिक एरा (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), देहरादून के प्रो-चांसलर प्रो. (डॉ.) राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि संस्थागत उत्कृष्टता के लिए निरंतर सुधार को कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना जरूरी है। गुणवत्ता आश्वासन को केवल मान्यता और रैंकिंग तक सीमित रखने के बजाय शिक्षण, शोध, प्रशासन, विद्यार्थी विकास और हितधारकों की सहभागिता से जोड़ना चाहिए। उन्होंने नियमित मूल्यांकन और सुधार को उत्कृष्टता की सतत प्रक्रिया बताया। इस दौरान एफडीसी निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग, उपनिदेशक डॉ. माधुरी हुड्डा सहित प्रतिभागी शिक्षक मौजूद रहे।