बाज़ीगर भाईचारे से जुड़ी कमल धर्मसोत लिखित पुस्तक लोकार्पित

किसी जाति के इतिहास से जुड़ी पुस्तकें उस जाति को अमीर बनाती हैं:गंडम

बाज़ीगर भाईचारे से जुड़ी कमल धर्मसोत लिखित पुस्तक लोकार्पित
पुस्तक को लोकार्पित करते हुए अध्यक्ष डा.जवाहर धीर के साथ लेखक कमल धर्मसोत,टी.डी.चावला,डा.यश चोपड़ा व अन्य। 

फगवाड़ा: दोआबा साहित्य एवं कला अकादमी की विशेष सभा,जो अकादमी के अध्यक्ष डॉ जवाहर धीर के नेतृत्व में गत दिवस आर्य माडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल,गौशाला रोड में आयोजित हुई, में प्रवासी भारतीय लेखक कमल धर्मसोत लिखित पंजाबी पुस्तक 'वक्खरे राहां दे पांधी' का शानदार उपस्थिति में लोकार्पण किया गया। बाज़ीगर जाति के दिग्गजों से भरे सभागार में लोकगायक, गीतकार, राजनीतिक और साहित्यकारों आदि ने एक स्वर में इस बात की प्रशंसा की कि इस पुस्तक के प्रकाशन ने सिद्ध कर दिया है कि किसी विशेष स्थान,जाति या किसी व्यक्ति द्वारा किए गए नेक कामों को पुस्तकों में लिखा इतिहास जिंदा रखता है।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रो. जसवंत सिंह गंडम ने कहा कि बाजीगर जाति द्वारा दी कुर्बानियों का विशेष ज़िक्र गुरु ग्रंथ साहिब में भी मिलता है,जो इस कौम के लिए फख़र की बात है। यह किताब इस कौम की नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का काम करेगी। इस अवसर पर उपस्थित डा.यश चोपड़ा ने साहित्यकार गुरमीत पलाही के लेख को पढ़ते हुए कमल धर्मसोत का परिचय दिया। रविन्द्र सिंह चोट, टी.डी.चावला, कुलविंद्र कौर काहलों,गुरमुख लोहार, मलकीत सिंह रघवौत्रा, रमेश कौल,बीराराम बलजोत, जगजीवन मुछाल आदि ने भी अपने-अपने विचार रखे।

इस अवसर पर कार्यक्रम को मनोरंजक बनाने में उपस्थित कवियों बलदेव राज कोमल,शाम सरगूंदी, रविन्द्र सिंह राय, निरवैर सिंह नंधा,दलविन्द्र दयालपुरी,नीरु ग्रोवर पर्ल,बीबा कुलवंत,आर.एल.जस्सी आदि ने अपने-अपने अंदाज में गीत, कविताएं आदि सुनाईं। अध्यक्ष डा.जवाहर धीर ने कमल धर्मसोत का इस बात के लिए आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण पुस्तक को लोकार्पित करने के लिए दोआबा अकादमी के मंच को चुना।

इस अवसर पर गुरजीत पाल वालिया,हनी धालीवाल,जय सिंह,नीलम वदाणा,गीता वदाणा,दर्शन लाल धर्मसोत,आर.के.बांसल गमनू, अवतार चंद,अजय बांसल,संदीप धरमसोत बिल्लू,बिंदर वदाणा, चरणजीत धर्मसोत,अशोक कमल, महिन्द्र पाल धर्मसोत आदि भी उपस्थित थे।