सीआरएम मशीनों पर 50 प्रतिशत अनुदान के लिए आवेदन 3 अगस्त तकः डीसी सचिन गुप्ता
रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने जिला के किसानों का आह्वान किया है कि वे फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजना का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (सीआरएम) घटक के अंतर्गत किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया जाएगा।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि इच्छुक किसान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल agriharyana.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 3 अगस्त है। व्यक्तिगत श्रेणी में एक परिवार पहचान पत्र (पीपीपी आईडी) से केवल एक किसान का ही चयन किया जाएगा तथा एक किसान केवल एक मशीन के लिए आवेदन कर सकेगा। अनुदान भी केवल एक ही मशीन पर देय होगा। हालांकि यदि किसी किसान का चयन स्ट्रॉ बेलर के लिए होता है तो उसे स्ट्रॉ रैक तथा रोटरी स्लेशर/श्रबमास्टर खरीदने की भी अनुमति होगी।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत किसान सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर/मल्चर, श्रबमास्टर/रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लो, जीरो टिल सीड फर्टिलाइजर ड्रिल, सुपर सीडर, सरफेस सीडर, स्ट्रॉ बेलर, स्ट्रॉ रेक, क्रॉप रीपर, ट्रैक्टर माउंटेड लोडर (बिना ट्रैक्टर) तथा ट्रैक्टर ड्रॉन टेडर मशीन सहित विभिन्न फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए किसान का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर वर्ष 2025-26 की खरीफ एवं रबी फसलों का पंजीकरण होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक खाते का विवरण, स्वयं घोषणा पत्र, हरियाणा में पंजीकृत ट्रैक्टर की वैध आरसी (केवल ट्रैक्टर चालित मशीनों के लिए), छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए पटवारी की रिपोर्ट तथा अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए एससी प्रमाण-पत्र आवश्यक होगा। साथ ही आवेदक ने संबंधित मशीन पर पिछले तीन वर्षों के दौरान विभाग की किसी भी योजना के अंतर्गत अनुदान प्राप्त नहीं किया होना चाहिए।
यदि किसी मशीन के लिए प्राप्त आवेदन निर्धारित लक्ष्य से अधिक होते हैं तो पात्र लाभार्थियों का चयन उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति (डीएलईसी) द्वारा ड्रा ऑफ लॉट्स के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। उन्होंने किसानों से इस योजना का लाभ उठाकर फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने, पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। योजना संबंधी अधिक जानकारी के लिए किसान किसी भी कार्य दिवस में सहायक कृषि अभियंता, रोहतक के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
Girish Saini 


