सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ की याद में सालाना मेला 23 फरवरी से
महंत बालकनाथ योगी ने लिया फाइनल तैयारियों का जायजा, दिए आवश्यक दिशा निर्देश।
रोहतक, गिरीश सैनी। सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ की पुण्य स्मृति में मठ अस्थल बोहर में 23 से 25 फरवरी तक लगने वाले तीन दिवसीय भव्य मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाबा मस्तनाथ मठ के गद्दीनशीन महंत बालकनाथ योगी ने रविवार को मठ परिसर व मेला स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने समाधि स्थल, मुख्य मंदिर, पंडाल, भंडारा स्थल, पेयजल केंद्र और सुरक्षा प्रबंधों का अवलोकन करते हुए संबंधित सेवादारों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि मेले के दौरान किसी को असुविधा न हो।
उल्लेखनीय है कि इस साल मेले की सजावट विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंदिर तक भव्य तोरण द्वार, रंगीन ध्वज और पुष्प सज्जा के साथ-साथ पूरा मठ रंग-बिरंगी रोशनियों से आलोकित है। बाबा मस्तनाथ की समाधि स्थल को सुगंधित पुष्पों और दीपमालाओं से सजाया गया है, जहां श्रद्धालु श्रद्धा पूर्वक नतमस्तक हो रहे हैं।
मेले के शुभारंभ पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। बाबा मस्तनाथ की शिक्षाओं और आध्यात्मिक संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रवचन सत्रों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिनमें देशभर के संत-महात्मा, धर्मगुरु और विद्वान शामिल होंगे। भजन-कीर्तन के कार्यक्रमों में प्रसिद्ध मंडलियां प्रस्तुति देंगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, भोजन और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। विभिन्न स्थानों पर विशेष भंडारों में निशुल्क प्रसाद वितरित किया जाएगा। सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के अलावा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे मेले पर नजर रखी जाएगी। मेले में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र की गणमान्य हस्तियों के पहुंचने की संभावना है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हर रोज हजारों श्रद्धालुओं के मेले में आने की संभावना है। मठ के सेवक और भक्त उत्साहपूर्वक सेवा कार्यों में सक्रियता के साथ जुटे हुए हैं।
मठ प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं से अनुशासन बनाए रखने और आध्यात्मिक वातावरण की पवित्रता को बनाए रखने की अपील की है। धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ ही ये सालाना मेला सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक है।

Girish Saini 

