एनेस्थिसियोलॉजी अब सिर्फ ओटी तक सीमित नहीं रहाः कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

पीजीआईएमएस में रीजनल एनेस्थीसिया-2026 आयोजित।

एनेस्थिसियोलॉजी अब सिर्फ ओटी तक सीमित नहीं रहाः कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

रोहतक, गिरीश सैनी। पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि आज हेल्थकेयर अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एविडेंस-बेस्ड प्रैक्टिस ने मेडिकल साइंस को नया आयाम दिया है। इस यात्रा में एनेस्थिसियोलॉजी सबसे डायनामिक और तकनीकी रूप से संचालित स्पेशलिटी बनकर उभरी है। एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की भूमिका अब केवल ऑपरेशन थियेटर तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्री-ऑपरेटिव मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, ट्रामा मैनेजमेंट, पेन मेडिसिन, इमरजेंसी रिस्पांस और पेशेंट सेफ्टी में लीडर बन चुके हैं।

कुलपति रविवार को पीजीआई के एनेस्थिसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग द्वारा इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स के तत्वावधान में आयोजित कॉन्फ्रेंस ऑन अल्ट्रासाउंड गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया एंड वैस्कुलर एक्सेस – रीजनल एनेस्थीसिया 2026 (नर्व एंड प्लेक्स) को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि एनेस्थीसिया स्पेशलिटी में जितने भी बदलाव आए हैं, उनमें अल्ट्रासाउंड-गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया एक गेम चेंजर साबित हुआ है। रियल टाइम में शरीर की संरचना देखने की क्षमता ने रीजनल ब्लॉक और वास्कुलर एक्सेस की सटीकता, प्रभावशीलता और सुरक्षा को काफी बढ़ा दिया है। इससे मरीज को कम दर्द होता है, जटिलताएं घटती हैं, ओपिओइड की जरूरत कम होती है, रिकवरी तेज होती है और सर्जिकल परिणाम बेहतर होते हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक व्याख्यान सैद्धांतिक आधार देते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ही ज्ञान और उसके उपयोग के बीच की दूरी को पाटती है।

पीजीआईएमएस के निदेशक एवं आयोजन अध्यक्ष डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि फाइबर ऑप्टिक और नई तकनीकें तेजी से आ रही हैं, ऐसे में अपडेट रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से खुलकर बातचीत करें, अपना काम प्रस्तुत करें और सीखने का दायरा बढ़ाएं।

ऑर्गेनाइजिंग को-चेयरपर्सन डॉ. सुशीला तक्षक ने शुरू में स्वागत संबोधन किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

वर्कशॉप कोऑर्डिनेटर डॉ जतिन लाल ने बताया कि इस दौरान अल्ट्रासाउंड-गाइडेड अपर लिंब ब्लॉक, लोअर लिंब ब्लॉक, ट्रंकल ब्लॉक, कॉडल ब्लॉक, स्पाइनल और एपीड्यूरल एनेस्थीसिया तथा वास्कुलर एक्सेस पर प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में रीजनल एनेस्थीसिया प्रक्रियाओं की सटीकता, सुरक्षा और सफलता दर बढ़ाने में अल्ट्रासाउंड की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

आयोजन सचिव डॉ. टीना बंसल ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस में अल्ट्रासाउंड मशीनों पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों और विदेश से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इस कॉन्फ्रेंस में 100 से अधिक डेलीगेट्स, फैकल्टी मेंबर्स व पीजी छात्रों ने भाग लिया।

इस दौरान इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स के अध्यक्ष डॉ. नवीन मल्होत्रा, हरियाणा मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार एवं एचएमसी ऑब्जर्वर डॉ. मनदीप सचदेवा, बहरीन से डॉ. रीता सिंह, डॉ प्रीति, डॉ तरुण सहित प्रतिभागी मौजूद रहे।