लघुकथा/अनंत

लघुकथा/अनंत
मनोज धीमान।

चिड़िया का जन्म एक बड़े पिंजरे में हुआ था। उसकी माँ उसे जन्म देते ही मर गई थी। चिड़िया का मालिक उसे ख़ूब खाने पीने को देता था। चिड़िया बहुत खुश थी। वह पिंजरे में ही उड़ान भर्ती और वापस आकर अपनी जगह पर बैठ जाती। उसके लिए वही उसका संसार था। वह अपने मालिक को मन ही मन शुक्रिया अदा करती। एक दिन उसका मालिक पिंजरे को बंद करना भूल गया। उसने पिंजरा खुला देखा। वह तुरंत पिंजरे से बाहर निकल आयी। उसने खुले आसमान की तरफ देखा और उड़ान भर दी। पिंजरे को पीछे छोड़ते हुए वह मीलों दूर निकल आयी थी। खुले आसमान में। उसने कभी ऐसी दुनिया के बारे में ख़्वाब में भी नहीं सोचा था। अब वह सोच रही थी- क्या इससे आगे भी कुछ और हो सकता है? इससे बड़ा कोई संसार?
-मनोज धीमान।