पुनर्वास में शारीरिक उपचार के साथ मानसिक संबल भी जरूरीः डॉ. विनोद कुमार
बीएमयू में राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंसः मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श और आधुनिक तकनीक की भूमिका पर मंथन
रोहतक, गिरीश सैनी। बाबा मस्तनाथ विवि, अस्थल बोहर और स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर रिहैबिलिटेशन ट्रेनिंग एंड रिसर्च (सिरतार) के सहयोग से एसोसिएशन ऑफ रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजिस्ट्स-इंडिया (एआरपीआई) की दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस रिहैब साइकोकॉन-2026 संपन्न हुई। इसमें देशभर के विशेषज्ञों ने पुनर्वास सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और उनकी गुणवत्ता सुधारने पर विचार साझा किए।
बीएमयू के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि पुनर्वास केवल शारीरिक उपचार तक सीमित नहीं है। दिव्यांगजनों और विशेष जरूरतों वाले व्यक्तियों को मानसिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर बनाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक परामर्श तनाव, भय और निराशा से उबरने में मदद करता है। समय पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं आत्महत्या की घटनाओं में कमी लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कॉन्फ्रेंस में बाल एवं विकासात्मक पुनर्वास, तंत्रिका पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समावेश, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिहैबिलिटेशन-2030 पहल के अनुरूप देश में पुनर्वास सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।

Girish Saini

