स्वास्थ्य विज्ञान विवि 11 साल बाद कर रहा 44वें नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन 2026 की मेजबानी
एनजेएकॉन 2026 में आर्थोपेडिक क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर रहेगा जोर।
रोहतक, गिरीश सैनी। पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के हड्डी रोग विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय 44वें नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (एनजेएकॉन 2026) का शुक्रवार को आगाज हुआ। एक्सप्रेस, एजूकेट, इवॉल्व थीम पर आधारित इस सम्मेलन का उद्देश्य आर्थोपेडिक क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और अनुसंधानों को साझा करना है।
पीजीआई के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूपसिंह ने पत्रकारों से संवाद करते हुए बताया कि सम्मेलन के पहले दिन कैडेवरिक और सॉ बोन वर्कशॉप का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने एडवांस्ड नी आर्थ्रोस्कोपी, रिवीजन नी आर्थ्रोप्लास्टी, पेल्वी-एसिटेबुलर ट्रॉमा, हाई टिबियल ओस्टियो टॉमी और स्पाइन फिक्सेशन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया। 15 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन में आर्थोपेडिक क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ध्यान रहे कि, स्वास्थ्य विज्ञान विवि इस प्रतिष्ठित नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन की मेजबानी 11 साल बाद कर रहा है।
डॉ. आशीष देवगन ने बताया कि सम्मेलन में आर्थोपेडिक सर्जरी के नवीनतम उपकरणों और तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया है, जिसमें स्पाइनल सर्जरी और नी आर्थ्रोप्लास्टी पर विशेष फोकस है। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के लगभग 500 आर्थोपेडिक विशेषज्ञ और चिकित्सा विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं में प्रैक्टिकल अनुभव और केस स्टडीज पर जोर दिया गया।
डॉ. उमेश यादव ने बताया कि विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए, जिनमें विफलता के कारणों की पहचान, रेडियोलॉजिकल मूल्यांकन, और हड्डी के नुकसान का प्रबंधन शामिल था। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए तथा फीडबैक भी लिया गया। इस दौरान दो हैंड्स-ऑन सॉ-बोन मॉड्यूल भी आयोजित किए गए, जिसमें सर्जनों ने प्रत्यारोपण हटाने और जॉइंट लाइन पुनर्स्थापन जैसी तकनीकों का अभ्यास किया।

Girish Saini 

