गर्भावस्था में लिंग जांच के अपराध में संलिप्त व्यक्तियों पर प्रशासन सख्त, 5 साल तक कारावास व एक लाख रुपये तक हो सकता है जुर्माना
रोहतक जिले में पीसीपीएनडीटी अधिनियम सख्ती से किया जा रहा लागूः डीसी सचिन गुप्ता
रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा है कि जिला में पीसीपीएनडीटी अधिनियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है। गर्भावस्था में लिंग जांच करवाना अपराध है। ऐसा करने एवं करवाने वाले दोनों को कानूनी प्रावधान के तहत 5 साल तक कारावास व एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। कन्या भ्रूण लिंग जांच करने व करवाने वाले व्यक्तियों की सही सूचना देने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपये नकद इनाम दिया जाता है तथा उनका नाम भी गुप्त रखा जाता है।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा है कि गर्भावस्था में लिंग परीक्षण करने, सहयोग देने वाले चिकित्सक व जांच करवाने वाली गर्भवती महिला के पति व रिश्तेदार को 5 साल तक कारावास एवं एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। उन्होंने कहा कि गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण करना अथवा करवाना, इसके लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है।
उन्होंने जिला के नागरिकों का आह्वान किया है कि यदि आपके क्षेत्र में कोई व्यक्ति भ्रूण लिंग जांच व कन्या भ्रूण हत्या के अमानवीय कार्य में संलिप्त है, तो उसकी सूचना टोल फ्री नंबर 1800-1800-181/ 181 या मोबाइल संख्या 72063-18703 व 70150-77500 पर दें। जिला प्रशासन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसी सूचना प्राप्त होते ही तुरंत रेड की जाती है तथा ऐसे अमानवीय कार्यों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जाती है।

Girish Saini 

