किरदार की मानसिकता समझे बिना अभिनय अधूरा: अखिलेंद्र मिश्रा

आईएफएफएच की मास्टर क्लास में संवाद याद करने से आगे बढ़ने की दी सलाह।

किरदार की मानसिकता समझे बिना अभिनय अधूरा: अखिलेंद्र मिश्रा

रोहतक, गिरीश सैनी। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ हाइफा (आईएफएफएच) के दूसरे दिन आयोजित मास्टर क्लास में प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने कलाकारों को अभिनय की बारीकियां समझाई। उन्होंने कहा कि प्रभावी अभिनय के लिए केवल संवाद याद करना पर्याप्त नहीं है। अभिनेता को किरदार की मानसिकता, उसकी परिस्थितियों और आसपास के सामाजिक परिवेश को समझना जरूरी है।

करीब 55 फिल्मों में अभिनय कर चुके मिश्रा ने सरफरोश, लगान, गंगाजल, हलचल, वीर जारा और अपहरण जैसी फिल्मों में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और चरित्र निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कलाकारों को अभिनय में स्वाभाविकता बनाए रखने और निरंतर अभ्यास करने की सलाह दी।

मिश्रा ने कहा कि कलाकार को समाज, लोगों और घटनाओं का सूक्ष्म अवलोकन करना चाहिए। ये अनुभव किरदार को पर्दे पर विश्वसनीय बनाने में मदद करते हैं। उन्होंने रंगमंच को अभिनय की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि थिएटर अनुशासन, आवाज, देह-भाषा और दर्शकों से सीधा संवाद करना सिखाता है।