देश-विदेश की शीर्ष प्रदर्शनियों जैसी है अभिव्यंजनाः विवेक अत्रे
पेड़ों की छाल, जूट व टाइल के टुकड़ों से बनी कलाकृतियां लुभा रही दर्शकों को।
रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक के फैकल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स द्वारा आयोजित 11वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी अभिव्यंजना को लेकर कला प्रेमियों व छात्रों के बढ़ते उत्साह को देखते हुए विवि प्रशासन ने प्रदर्शनी की अवधि दो दिन और बढ़ा दी है। अब यह प्रदर्शनी 10 मई तक जारी रहेगी।
शुक्रवार को पूर्व आईएएस अधिकारी व मोटिवेशनल स्पीकर विवेक अत्रे ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और छात्रों को प्रोत्साहित किया। फैकल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स के कोऑर्डिनेटर विनय कुमार और स्टाफ सदस्यों ने उनका स्वागत किया। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान छात्रों ने उन्हें अपनी कलाकृतियों के पीछे की सोच और विषयवस्तु के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विवेक अत्रे ने खुद भी चित्रों में रंग भरकर अपनी कलात्मक रुचि का परिचय दिया।
इसके बाद संवाद कार्यक्रम में कुलपति डॉ. अमित आर्य ने उनका स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। विवेक अत्रे ने कहा कि अभिव्यंजना में आकर उन्हें बेहद सकारात्मक अनुभव हुआ। यहां के छात्र बहुत प्रतिभाशाली, रचनात्मक व ऊर्जा से भरपूर हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित प्रदर्शनियां देखी हैं, लेकिन सुपवा की यह प्रदर्शनी किसी भी शीर्ष प्रदर्शनी से कम नहीं है। उन्होंने पोलैंड के प्रसिद्ध पियानिस्ट पादे रे व्हिस्की का उदाहरण देते हुए छात्रों को अपनी रचनात्मकता को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा पेड़ों की छाल, जूट व घास का उपयोग कर तैयार की गई कलाकृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनमें रानी पद्मावती द्वारा चित्तौड़गढ़ में किए गए जौहर की ऐतिहासिक घटना को भी दर्शाया गया है। इसके अलावा टाइल के टुकड़ों से तैयार कलाकृतियों में आपसी भाईचारे, छात्र जीवन व प्रकृति के सौंदर्य को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
प्रदर्शनी के सायं कालीन सत्र में आयोजित ओपन स्टेज कार्यक्रम भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। शाम साढ़े छह से रात आठ बजे तक आयोजित कार्यक्रम में छात्र म्यूजिक, डांस, कविता पाठ और अभिनय से जुड़ी प्रस्तुति दे रहे हैं।

Girish Saini 

