संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का निर्माण करती है गुरुकुल की शिक्षाः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान
कन्या गुरुकुल मोर माजरा में वार्षिकोत्सव।
करनाल, गिरीश सैनी। कन्या शिक्षा समाज के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। गुरुकुल में दी जाने वाली शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का निर्माण करती है। ये उद्गार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बतौर मुख्य अतिथि, कन्या गुरुकुल मोर माजरा के वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
गुरुकुल की प्रबंधक समिति के प्रधान एडवोकेट सुखबीर सिंह मान ने मुख्य अतिथि डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने गुरुकुल की गतिविधियों, छात्राओं की शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता के प्रयासों की जानकारी दी।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि कन्या शिक्षा किसी एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को संवारने का कार्य करती है। जब एक बेटी शिक्षित होती है तो आने वाली पीढ़ियां स्वतः ही संस्कारवान और जागरूक बनती हैं। गुरुकुल पद्धति भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण भी करती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बेटियों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। गुरुकुलों में दिया जाने वाला संस्कारयुक्त वातावरण छात्राओं को न केवल शिक्षा देता है, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की शक्ति भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिलना चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. चौहान ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्याओं का स्थान सदैव उच्च रहा है। प्राचीन काल में महिलाएं केवल गृहस्थ जीवन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि वे विदुषी और ऋषिकाएं भी थीं। लोपामुद्रा, गार्गी, मैत्रेयी, अपाला और घोषा जैसी ऋषिकाओं ने वेदों की रचना और दर्शन को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि आज की बेटियों को भी उसी गौरवशाली परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए भाषा का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंग्रेज़ी भाषा आज के समय की आवश्यकता है, लेकिन हिंदी भाषा का अच्छा ज्ञान होना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि हिंदी हमारी संस्कृति, संस्कार और पहचान की भाषा है।
गुरुकुल प्रबंधन और शिक्षकों की सराहना करते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि सीमित संसाधनों में भी जिस समर्पण भाव से छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य किया जा रहा है, वह अनुकरणीय है। समाज को ऐसे शिक्षण संस्थानों के साथ खड़ा होना चाहिए, ताकि संस्कार, शिक्षा और संस्कृति की यह धारा निरंतर आगे बढ़ती रहे। इस दौरान उपाध्यक्ष भूपेंद्र मान, सचिव ओम प्रकाश मान, संयुक्त सचिव बलवान सिंह, नरेंद्र सिंह बांगर, मेहर सिंह, भगवान सिंह, कृष्ण ढांडा, तेजवीर सिंह, नरेंद्र मान, दलीप सिंह मान, जसबीर सिंह मान, राजकुमार सैनी, संदीप खंडवाल, गुरप्रीत कौर, सुनीता सहरावत, बल्ला मंडल अध्यक्ष जय भगवान एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

Girish Saini 

