सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव ने दुबई में दिया जीवन को उत्सव बनाने का संदेश

कहा, धैर्य और संतुलन से होगा जीवन सार्थक।

सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव ने दुबई में दिया जीवन को उत्सव बनाने का संदेश

गिरीश सैनी/रोहतक

सिद्धेश्वर तीर्थ ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति के दुबई चैप्टर द्वारा आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में सिद्ध गुरु सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव के सानिध्य में दुबई के प्रमुख उद्योगपति, समाजसेवी, गणमान्य नागरिकों एवं भक्तों ने भाग लिया। देश और विदेश से पहुंचे भक्तों के ब्रह्मर्षि गुरुदेव ने आशीर्वाद दिया।

मानसिक संतुलन और संबंधों की महत्ता पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे मित्र और सच्चे रिश्ते जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जो सुख में साथ दे वह रिश्ता है और जो दुःख में साथ निभाए वही सच्चा साथी है। यदि मनुष्य अपने जीवन में अच्छे संबंधों को संजोए रखे, तो अवसाद जैसी स्थिति से दूर रह सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में मार्गदर्शक और मित्र का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग केवल बाहरी रूप से धार्मिकता का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन सनातन के मूल्यों से दूर हैं। उन्होंने धर्म को केवल वस्त्रों तक सीमित न रखकर आचरण में उतारे जाने का आह्वान किया। अटैच टू नथिंग, कनेक्टेड टू एवरीथिंग का गूढ़ अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य संसार के कर्तव्यों से भागे नहीं, उन्हें निभाते हुए अंदर से निर्लिप्त रहे। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सपने हमेशा बड़े देखने चाहिए और उन्हें साकार करने का साहस भी रखना चाहिए।

सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि ने जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर व्यक्ति इस संसार में आवश्यक है। हमे अपने स्थान को समझते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धैर्य, संतुलन और सकारात्मक सोच से ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता उन्होंने कहा कि जीवन किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि परमात्मा का अनमोल वरदान है, जिसे व्यर्थ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिनाइयां स्थाई नहीं होतीं, आवश्यकता है थोड़ा धैर्य रखने की।

वर्तमान पीढ़ी के पश्चिमी संस्कृति की ओर तेजी से आकर्षित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ये आत्ममंथन का विषय है। जीवन में संयम और मर्यादा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने जीवनशैली में संतुलन को आवश्यक बताया। ब्रह्म शरणम गच्छामि का उच्चारण करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अहंकार, भय और भ्रम से ऊपर उठकर परम सत्य की शरण स्वीकार करता है, तभी उसे सच्ची शांति, आत्मबल और जीवन का वास्तविक मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

कार्यक्रम का समापन आध्यात्मिक मंत्रोच्चार और आशीर्वचन के साथ हुआ। इस आयोजन ने दुबई में बसे भारतीय समुदाय को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम के प्रमुख आयोजक समाजसेवी कल्पेश किनारीवाला और दुबई चैप्टर की अध्यक्ष इतिक्षा बोहरा ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि दुबई जैसे वैश्विक शहर में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का ये आयोजन समुदाय को जोड़ने का माध्यम बना है। इस जौरान राजेश चोरड़ीया, विष्णु सराफ, बी.आर. सेठी,  राकेश बोहरा, दीपक सोनी, प्रदीप मोरजारिया, संगीता मोरजारिया, चंद्रशेखर भाटिया, मोहन गुरुनानी, अनिल शहरी, अशोक संचेती, अरविन्द मोदी, नवीन गिड़िया, शिल्पा मेहता, आर.के. मितल, योगेश मित्तल, रवि पुगलिया सहित अन्य गणमान्य जन मौजूद रहे।