Last seen: 56 years ago
काग्रेस चिंतन शिविर शुरू और कुछ प्रस्ताव बाहर । यानी एक परिवार , एक टिकट , महिलाओं...
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो
कहा, पत्रकार से बहुत उम्मीदें हैं जनता को और सीधे सवाल पूछती है
जो दिखता है वह है नहीं और जो है वो दिखता नहीं