हमारी संस्कृति, परंपरा और आत्मा का केंद्र हैं गांवः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

मेरा गांव–मेरी धरोहर विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम।

हमारी संस्कृति, परंपरा और आत्मा का केंद्र हैं गांवः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। गांव केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और आत्मा का केंद्र हैं। ये उद्गार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने संस्थान में मेरा गांव–मेरी धरोहर विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश भर से आए प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

इस कार्यक्रम में हरियाणा के सभी जिलों से आए ग्राम सचिवों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समन्वयक विकास एवं पंचायत विभाग, हरियाणा से साक्षी तथा हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान से डॉ. सुशील मेहता रहे। प्रारंभ में साक्षी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि मेरा गांव-मेरी धरोहर अभियान के माध्यम से गांवों की ऐतिहासिक धरोहर, लोक संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।

निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि गांवों की धरोहर को संरक्षित करना केवल अतीत को सहेजना नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य है। उन्होंने कहा कि ग्राम सचिव शासन और गांव के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। यदि ग्राम सचिव गांव की ऐतिहासिक विरासत, लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को समझ कर कार्य करें, तो विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण भी संभव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास और धरोहर दोनों साथ-साथ चलें, तभी समग्र ग्रामीण विकास साकार होगा।

डॉ. चौहान ने कहा कि मेरा गांव-मेरी धरोहर जैसी पहल गांवों में आत्मगौरव की भावना पैदा करती है और यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ही सफल हो सकता है। उन्होंने ग्राम सचिवों का आह्वान किया कि वे इस अभियान को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न मानकर जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उन्हें केवल फाइलों में नहीं, बल्कि मन से जमीन पर उतारा जाए। उन्होंने ग्राम सचिवों से अपने दायित्वों को मात्र नौकरी न समझ कर गांव के प्रति सेवा-भाव से निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब कार्य ईमानदारी, संवेदनशीलता और मन से किया जाता है, तब उसका प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गांव के हर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देता है।

इस दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से कंसलटेंट गुरबिदर सिंह, विकास और पंचायत विभाग से हिमांशु, ग्राम सचिव भगत सिंह, साहिल एवं अन्य प्रतिभागी मौजूद रहे।