आरएसएस के शताब्दी वर्ष के तहत विभिन्न जन गोष्ठियां आयोजित

पंच परिवर्तनों पर हुई चर्चा।

आरएसएस के शताब्दी वर्ष के तहत विभिन्न जन गोष्ठियां आयोजित

रोहतक, गिरीश सैनी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला में रोहतक जिले में चार प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन किया गया।

स्थानीय जिला विकास भवन में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता, संघ के उत्तर क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य डॉ. सीताराम व्यास और राष्ट्र सेविका समिति की तारा ने शिरकत की। डॉ. सीताराम व्यास ने संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित ये संगठन आज विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन बन चुका है।

महम में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता संघ के प्रांत कार्यालय प्रमुख संजय और रोहतक विभाग कार्यवाह डॉ. देवेंद्र रहे। संजय ने कहा कि संघ की स्थापना का मूल उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्र को सशक्त और आत्म-गौरव से युक्त बनाना था। डॉ. देवेंद्र ने कहा कि शताब्दी वर्ष तक आते-आते शिक्षा (विद्या भारती), सेवा (सेवा भारती), छात्र संगठन (एबीवीपी), महिला (राष्ट्र सेविका समिति), श्रमिक (भारतीय मजदूर संघ), ग्राम विकास, वनवासी कल्याण आश्रम, धार्मिक सांस्कृतिक संरक्षण (विश्व हिंदू परिषद), राजनीति, (भारतीय जनसंघ/ भाजपा) जैसी संघ की कई सहयोगी संस्थाएं राष्ट्रीय जीवन में सक्रिय हैं।

पीजीआईएमएस, रोहतक में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राजेश और भारत विकास परिषद एवं राष्ट्र सेविका समिति की सदस्य गीता गुप्ता रहे। राजेश ने संघ की यात्रा के विभिन्न पड़ावों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि संघ का योगदान केवल राष्ट्रवादी विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, ग्रामीण विकास, आपदा-राहत, सेवा, स्वदेशी, पर्यावरण, श्रमिक संगठन, ग्राम विकास, वनवासी कल्याण उत्थान समेत जीवन के हर क्षेत्र में संघ का गहरा प्रभाव है।

डीएलसी सुपवा में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख प्रदीप शर्मा एवं राष्ट्र सेविका समिति की सदस्य डॉ. पिंकप्रभा ने भाग लिया। प्रदीप शर्मा ने कहा कि संघ की सबसे बड़ी विशेषता किसी संकट या आपदा के समय त्वरित, संगठित और स्वाभाविक सेवा रही है।

सभी कार्यक्रमों में संघ के पंच परिवर्तनों - सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी आधारित जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य बोध अथवा शिष्टाचार पर चर्चा की गई।