कृष्ण कुमार तूर की शायरी में शब्दों और अर्थों की एक रोशन दुनिया मौजूद है: डॉ. अली अब्बास
उर्दू विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में कृष्ण कुमार तूर की याद में शोक सभा का आयोजन
चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के उर्दू विभाग में उर्दू के प्रख्यात शायर कृष्ण कुमार तूर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विभाग के अध्यक्ष डॉ. अली अब्बास ने कहा कि उन्हें शब्दों के इस्तेमाल और उनके भीतर छिपे अर्थों पर इस कदर महारत हासिल थी कि पाठक एक या दो बार के पाठ में उनके शेरों में मौजूद अर्थ की परतों तक नहीं पहुँच सकता। उनकी काव्य-दुनिया में दिखने वाली सरल और सीधी भाषा पर यदि गौर किया जाए, तो उसकी विभिन्न दिशाएँ और परतें हमारे सामने उजागर होती हैं।
डॉ. अब्बास ने अपने उद्घाटन भाषण में आगे कहा कि कृष्ण कुमार तूर ने अपनी शायरी में मानवता और अध्यात्म (इरफ़ान) को सबके लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने विभिन्न धर्मों के गुरुओं के प्रति भी अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है। विभागाध्यक्ष ने उनकी शायरी पर चर्चा करते हुए आगे कहा कि कृष्ण कुमार तूर के भीतर एक ऐसा व्यक्ति भी मौजूद था, जिसकी आँखों में विस्थापन (हिजरत) का दर्द और एक तरह की बेरुख़ी या अलगाव का अहसास था।
इस अवसर पर प्रोफेसर रिहाना परवीन ने अपने शोक संदेश में कृष्ण कुमार तूर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया, उनके लिए प्रार्थना की और उनके कुछ शेर पढ़कर उन्हें याद किया। फ़ारसी के शिक्षक डॉ. ज़ुल्फ़िकार अली ने कृष्ण कुमार तूर की शायरी के हवाले से बात करते हुए कहा कि उनका शुमार उर्दू के बड़े शायरों में होता है, जिसकी जीवित मिसाल हमारा उन्हें याद करने के लिए यहाँ एकत्रित होना है। उन्होंने आगे बताया कि भाषा को जानना और उसका उपयोग करना दो अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं, लेकिन तूर साहब को इन दोनों में महारत हासिल थी।
इस मौके पर विभाग की शिक्षिका डॉ. ज़रीन फ़ातिमा ने तूर साहब की ग़ज़ल पढ़कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। विभाग के रिसर्च स्कॉलर खलीक अवन ने कृष्ण कुमार तूर के जीवन और शायरी के विषय पर एक विस्तृत शोध पत्र (मक़ाला) भी प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
इस अवसर पर कृष्ण कुमार तूर की ग़ज़लें पढ़कर उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले छात्रों में खलीक अवन, गुरविंदर सिंह गाफ़िल, मोहम्मद अली, सिमरनजीत कौर, काकुल सिंह, इंद्रजीत कौर संधू और अरविंदर कौर शामिल रहीं। कार्यक्रम के संचालन (निज़ामत) का दायित्व रिसर्च स्कॉलर सैयद सलीम बुख़ारी ने बख़ूबी निभाया। अंत में विभाग की रिसर्च स्कॉलर शीतल वर्मा ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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