राज्यसभा चुनाव का तिलिस्म
-कमलेश भारतीय
हरियाणा विधानसभा के विधायकों ने जो चुनाव किया, वह किसी तिलिस्म से कम नहीं। जहां सीधे 37 वोट मिलने थे और बम्पर जीत होनी थी, वहां सिर्फ 66 वोट से ही जीत हुई कांग्रेस के बौद्ध की यानी वे हारते हारते बाल बाल बचे और कांग्रेस के खिलाफ भाजपा की हैट्रिक नहीं बन पाई। कर्मवीर किस्मत के करमवीर निकले। सोचो, ऐसे में यदि इनेलो राज्यसभा चुनाव में वोट डालती तो क्या परिणाम होता? तभी तो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इनेलो को कांग्रेस की बी टीम कह दिया। यदि इनेलो ने वोट दिये होते तो कांग्रेस भी इनेलो को भाजपा की बी टीम ही कहती। अच्छा फैसला कहा जा सकता है वोट न डालने का। अब कांग्रेस ने पांच विधायकों के नाम सार्वजनिक कर दिये हैं, जिन्होंने कांग्रेस के साथ कथित रूप से धोखा क्रास वोटिंग की जबकि चार विधायकों के वोट रद्द हो गये यदि भाजपा का एक वोट रद्द न हुआ होता तो भी परिणाम कुछ और हो सकता है। अब विधानसभा में कांग्रेस भाजपा पर वोट चोरी का, लोकतंत्र की चोरी का इल्जाम लगा रही है तो भाजपा पूछ रही है कि पहले कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि कांग्रेस बताये कि इसके विधायक बिकाऊ हैं या नहीं? कुफ्री में बाडे़बंदी करने का भी कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि बताया जाता है कि भाजपा का गेम जनवरी से शुरू था। इस तरह आरोप प्रत्यारोप जारी हैं। कांग्रेस विधायकों ने हिमाचल के मज़े भी लिये और मन में लड्ड भी फूटते रहे, जो क्रास वोटिंग का कारण बने! आखिर कैडबरी के चाकलेट लड्डू जो थे, भाई! कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा का कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा के लिए काम करते हुए कांग्रेस वोट रद्द किये और उन्हें नये महत्वपूर्ण विभाग उपहार में दिये गये जबकि रिट्रनिंग ऑफिसर का कहना है कि सब फैसले विधान सम्मत किये । ये आरोप लगाना एकदम निराधार हैं ।
अब कांग्रेस ने पांच विधायकों को कारण बताओ नोटिस थमा दिये हैं और सभी मीडिया में अपने आपको कांग्रेस के सच्चा सिपाही कहते हैं केवल एक को छोड़कर जिसने आत्मा की आवाज पर वोट दिया । राज्यपाल को भी कांग्रेस ने ज्ञापन दिया पर उसमें वे पांच विधायक शामिल नहीं थे, जिनके नाम क्रास वोटिंग में आये थे। विधायकों ने बताया कि अनेक तरह के प्रलोभन व फाइल खुलने के डर दिखाये गये।शैली चौधरी के पति गुर्जर ने कांग्रेस के अपने पद से इस्तीफा देते कहा कि हमें जानबूझकर निशाना बना कर,गुटबाजी में घसीटा जा रहा है जबकि चार रद्द वोट वालों को नहीं खोजते और न ही उन पर कोई कार्यवाही की जाने की संभावना है। उनके नाम भी सामने लाये जायें।परमजीत सिंह का वोट रद्द हुआ, बाकी तीन कौन और कैसे रद्द हो गये?उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कार्यशैली की तारीफ कर भाजपा में जाने के संकेत भी दे दिये हैं। शैली के पति कहते हैं कि वोट नौ हैं, जो बाहर गये और कार्यवाही पांच पर ही क्यों? बहुत बड़ी बेइंसाफी है यह। राहुल सेतिया और मंजू चौधरी कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे कि उनका नाम क्यों, वे तो सच्चे सिपाही हैं तब नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा इन्हें धरने से उठाने गये!अभी कांग्रेस में राज्यसभा सीट जीत कर भी घमासान थमता नहीं दिख रहा। वैसे भाजपा को भी अपने रद्द वोट वाले विधायक की खोज करनी चाहिए। नहीं तो नांदल हारते नहीं। सतीश नांदल का कैच ऐन बाउंडरी पर लपक लिया गया, नहीं तो भाजपा हैट्रिक लगा देती और कांग्रेस देखती रह जाती। इज़्ज़त बची लाखों पाये ।

Kamlesh Bhartiya 

