सिर्फ ज्ञानदाता नहीं, अकादमिक लीडर बनें शिक्षकः कुलपति प्रो पूनियाँ

एमडीयू में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू

सिर्फ ज्ञानदाता नहीं, अकादमिक लीडर बनें शिक्षकः कुलपति प्रो पूनियाँ

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) द्वारा डीएवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, फरीदाबाद के सहयोग से लीडरशिप कॉम्पिटेंसीजः एन्हान्सिंग एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन विषय पर सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू हुआ। कार्यक्रम में 22 राज्यों से करीब 160 शिक्षक ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से भाग ले रहे हैं।

कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि कक्षा में खड़ा प्रत्येक शिक्षक एक अकादमिक लीडर है। उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों में प्रभावी नेतृत्व और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दृष्टि भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि एआई के दौर में केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है। सोशल इंटेलिजेंस, मानवीय संवेदनशीलता, संवाद कौशल, टीमवर्क और दूसरों को समझने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। शिक्षक विद्यार्थियों में नेतृत्व, नवाचार, समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन जैसे कौशल विकसित करें।

कुलपति ने शिक्षकों से ज्ञान प्रदाता की भूमिका से आगे बढ़कर मेंटर, फैसिलिटेटर और परिवर्तन के नेतृत्वकर्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के बीच शिक्षकों को अपने ज्ञान व कौशल को लगातार अपडेट करते हुए शोध और नवाचार को शिक्षण से जोड़ना होगा।

कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि एफडीपी का विषय उच्च शिक्षा की मौजूदा जरूरतों से सीधे जुड़ा है। उन्होंने एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत नेतृत्व और मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर दिया।

एमएमटीटीसी निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों में नेतृत्व क्षमता विकसित कर शैक्षणिक उत्कृष्टता और संस्थागत बदलाव को गति देना है। कार्यक्रम में गीता यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर निशांत बंसल, सीडीएलयू के कुलपति प्रो. विजय कुमार और आईआईएम जम्मू के चीफ इनोवेशन ऑफिसर प्रो. विवेक शर्मा ने नेतृत्व, एआई, नवाचार व उद्यमिता पर व्याख्यान दिए।