ज्ञान निर्माण, बौद्धिक विकास और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन है शोधः वीसी प्रो. बी.एम. यादव

बीएमयू में पीएचडी ओरिएंटेशन कार्यक्रम।

ज्ञान निर्माण, बौद्धिक विकास और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन है शोधः वीसी प्रो. बी.एम. यादव

रोहतक, गिरीश सैनी। बाबा मस्तनाथ विवि, अस्थल बोहर में शैक्षणिक सत्र 2025–2026 के लिए पीएचडी ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आइक्यूएसी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 250 नवप्रवेशी शोधार्थियों ने भागीदारी की।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर प्राध्यापकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने नवप्रवेशी शोधार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें शोध के प्रति समर्पित, अनुशासित और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान एक शोध पुस्तिका का भी औपचारिक विमोचन किया गया।

कुलपति प्रो. बी.एम. यादव ने अपने संबोधन में शोध की मूल भावना और उसकी सामाजिक उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि शोध केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान निर्माण, बौद्धिक विकास और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन है। उन्होंने शोधार्थियों को जिज्ञासा, तार्किक और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक सच्चा शोधकर्ता वही है, जो स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने का साहस रखे और सत्य की खोज में निरंतर प्रयासरत रहे। उन्होंने विवि प्रशासन की ओर से गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए आवश्यक संसाधनों और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान-आधारित समाज का है, जहां अनुसंधान की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने शोध को केवल सैद्धांतिक विमर्श तक सीमित न रखते हुए उसे व्यावहारिक समस्याओं के समाधान, नवाचार और नीति-निर्माण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. नवीन कपिल ने शोध प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को सरल और व्यवस्थित तरीके से समझाया। उन्होंने विषय चयन से लेकर शोध-प्रकाशन तक की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए अंतर्विषयी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान शोधार्थियों ने अपने प्रश्नों के माध्यम से शोध से जुड़ी जटिलताओं को समझने का प्रयास किया।