प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल करने की सरकारी प्रक्रिया में शामिल हों धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधिः एडीसी नरेंद्र कुमार
प्राचीन ज्ञान संपदा को सहेजने के लिए सरकार का व्यापक अभियान जारी।
रोहतक, गिरीश सैनी। अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला परिषद के सीईओ नरेंद्र कुमार ने जिला के धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों का आह्वान किया है कि वे पांडुलिपियों को डिजिटल करने की प्रक्रिया में शामिल हो। सरकार द्वारा प्राचीन ज्ञान संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से चलाये जा रहे विशेष व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत पांडुलिपियों की पहचान और उनके दस्तावेजीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
एडीसी नरेंद्र कुमार ने ज्ञान भारतम मिशन के तहत आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक 23 हजार से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी एकत्रित की जा चुकी है तथा जिला में 170 पांडुलिपियों की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान संपदा को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सभी जिलों में पांडुलिपियों की पहचान एवं दस्तावेजीकरण के लिए तीन माह का सघन सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें विशेषज्ञों एवं इतिहासकारों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने धार्मिक संगठनों एवं शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों से कहा कि यदि उनके पास ऐसी पांडुलिपियां उपलब्ध है तो वे ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों को डिजिटल करने की प्रक्रिया में शामिल हों। इस संदर्भ में अभिलेखागार विभाग के स्थानीय लघु सचिवालय के तीसरे तल पर स्थित कमरा नं. 315 में सहायक निदेशक कार्यालय में संपर्क कर सकते है।
एडीसी नरेंद्र कुमार ने कहा कि नागरिक प्ले स्टोर से ज्ञान भारतम ऐप डाउनलोड करके इसके माध्यम से अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों, मानचित्रों एवं पुरानी तस्वीरों का विवरण अपलोड कर सकते हैं। हरियाणा अभिलेख विभाग द्वारा आमजन को इन सामग्रियों को दान करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि इन्हें वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में प्राचीन मंदिर, मठ एवं निजी संग्रह अधिक हैं, वहां अभिलेखों का भौतिक सत्यापन और जियो-टैगिंग का कार्य भी किया जा रहा है। इस पहल से हरियाणा की पांडुलिपियों का एक डिजिटल इन्वेंट्री मैप तैयार किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत युवाओं को पांडुलिपियों के संरक्षण कार्य से जुड़ने के लिए इंटर्नशिप के अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे वे अपने इतिहास और संस्कृति से जुड़ सकें।

Girish Saini 

