वर्ल्ड थिएटर डे पर सुपवा मे जुटेंगे देश के प्रसिद्ध नाटककार व रंगकर्मी

नाट्य संवाद व परिचर्चा में करेंगे छात्रों का मार्गदर्शन।

वर्ल्ड थिएटर डे पर सुपवा मे जुटेंगे देश के प्रसिद्ध नाटककार व रंगकर्मी

रोहतक, गिरीश सैनी। देश के प्रसिद्ध नाटककार व रंगकर्मी दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक में वर्ल्ड थिएटर डे पर होने वाले नाट्य संवाद व परिचर्चा में शिरकत कर छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे। वर्तमान संदर्भ में रंगमंचः डिजिटल मीडिया और तकनीक का प्रभाव विषय पर ये परिचर्चा फिल्म एवं टेलीविजन विभाग के स्टूडियो-1 में होगी।

फिल्म एवं टेलीविजन विभाग के एफसी महेश टीपी ने बताया कि इन हस्तियों में पद्मश्री प्रो वामन माधवराव केंद्रे, प्रसिद्ध नाटककार व लेखक डॉ प्रताप सहगल, प्रसिद्ध रंगकर्मी व नाट्य प्रशिक्षक डॉ मृत्युंजय प्रभाकर शामिल हैं। पद्मश्री वामन केंद्रे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), दिल्ली के निदेशक भी रह चुके हैं। उन्हें रंगमंच के माध्यम से एक मजबूत मंच का निर्माण करने और इसके माध्यम से समाज के उपेक्षित और हाशिए पर पड़े वर्गों (लोगों) के दर्द को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करने के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है।

वहीं प्रताप सहगल को कवि, नाटककार, कथाकार व आलोचक के रूप में जाना जाता है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रोहतक और मिडिल व उच्च शिक्षा दिल्ली में हुई। उन्होंने करीब 40 वर्षों तक स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के अध्यापन के साथ-साथ शोध-कार्य निर्देशित किया। डॉ मृत्युंजय प्रभाकर प्रसिद्ध रंगकर्मी व नाट्य प्रशिक्षक होने के साथ ही डॉ भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली के नाट्य विभाग में प्रोफेसर हैं। उन्होंने 50 से अधिक नाटक व पुस्तकें लिखी हैं। वे थिएटर ग्रुप शहर के फाउंडर-डायरेक्टर भी हैं।

महेश टीपी ने बताया कि वर्ष 1961 में वर्ल्ड थिएटर डे को दुनिया भर में मनाने व इसके महत्व बताने के लिए इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट की शुरुआत हुई। वर्ष 1962 से हर साल 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाना शुरू किया गया। ये दिन थिएटर कला के सार, खूबसूरती, महत्व, मनोरंजन में रंगमंच कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाता है।