वीबी जी राम जी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों और किसानों को देश की मुख्यधारा में लानाः सांसद बराला

कहा, कांग्रेस शासनकाल में मनेरगा भ्रष्टाचार और धन की लूट का माध्यम बन गई थी।

वीबी जी राम जी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों और किसानों को देश की मुख्यधारा में लानाः सांसद बराला

रोहतक, गिरीश सैनी। राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने कहा कि वीबी-जीरामजी योजना मोदी सरकार की एक क्रांतिकारी योजना है। प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है कि जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे हों तब तक हमारा देश विकसित राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आए। बराला ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मजदूर, किसानों को देश की मुख्यधारा में लाना है, ताकि सभी लोगों को भारत के विकसित राष्ट्र बनाने में पूरा योगदान हो।

बराला शुक्रवार को रोहतक स्थित भाजपा कार्यालय मंगलकमल में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान पूर्व मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय बंसल, प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी शमशेर खरक सहित अन्य मौजूद रहे।

कांग्रेस को घेरते हुए बराला ने कहा कि कांग्रेस किसी योजना का नाम बदले तो सही है, अगर भाजपा नाम बदलती है तो गलत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ और सिर्फ लोगों को भ्रम में डालती और गुमराह करती है। उन्होंने कहा कि वीबी जीरामजी योजना गरीब, मजदूर और किसान को मजबूत करने वाली योजना है। भाजपा सरकार चाहती है कि हर व्यक्ति के पास रोजगार उपलब्ध होना चाहिए। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले जवाहर रोजगार योजना, फिर नरेगा और उसके बाद मनरेगा नाम रखा। कांग्रेस केवल इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी के नाम पर योजनाओं के नाम रख रही है। कांग्रेस सिर्फ महात्मा गांधी के नाम का उपयोग कर रही है। महात्मा गांधी पूरे देश के हैं।

एक सवाल के जवाब में राज्यसभा सांसद ने कहा कि मनरेगा के तहत कांग्रेस पार्टी ने मनमोहन सिंह सरकार में 10 सालों के अंदर लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि भाजपा सरकार ने 10 वर्षों में इस योजना पर ढाई गुणा रुपये खर्च किए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी रामजी योजना मनरेगा के मुकाबले बेहतर योजना है। कांग्रेस पार्टी सिर्फ लोगों को भ्रम में डालकर इस योजना का दुष्प्रचार कर रही है, जबकि ये योजना श्रमिकों के कल्याण और गांवों के समग्र विकास की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है।

बराला ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा भ्रष्टाचार का केंद्र बनी हुई थी। उस दौर में मनरेगा भ्रष्टाचार, फर्जी परियोजनाओं और धन की लूट का माध्यम बन गई थी। बीते एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सेवाएं, डीबीटी, आधार लिंकिंग और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार हुआ है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।

वीबी जीरामजी’ योजना की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बराला ने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया है, जिससे श्रमिकों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण एवं उपस्थिति प्रणाली से फर्जी श्रमिकों, डुप्लीकेट जॉब कार्ड और फर्जी भुगतान पर रोक लगेगी। वेतन एवं भत्तों का सीधा डिजिटल भुगतान (डीबीटी) होने से बिचौलियों, देरी और धन के दुरुपयोग की समस्या समाप्त होगी। जियो-टैगिंग एवं सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से प्रत्येक परिसंपत्ति को आईएसआरओ  के भुवन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे फर्जी परियोजनाओं की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। ब्लॉक एवं जिला स्तर पर बहुस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली के साथ 7-दिवसीय निपटान समय सीमा भी तय की गई है।

उन्होंने कहा कि योजना के तहत एक नया ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किया जाएगा, जो काम मांगने, मजदूरी प्राप्त करने और अपने अधिकारों की मांग के लिए एक मजबूत और वैध दस्तावेज होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान की कटाई के दौरान 60 दिनों तक कार्य बंद रहेगा, ताकि खेती पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इस योजना के तहत ग्रामीण विकास कार्यों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है।