बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिक चिंताओं एवं जीसीपी पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

एमडीयू की ह्यूमन एथिक्स (एचईसी) द्वारा आर्यभट्ट सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन प्रयोगशाला (एसीआईएल) में बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिक चिंताओं एवं जीसीपी पर प्रशिक्षण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिक चिंताओं एवं जीसीपी पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू की ह्यूमन एथिक्स (एचईसी) द्वारा आर्यभट्ट सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन प्रयोगशाला (एसीआईएल) में बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिक चिंताओं एवं जीसीपी पर प्रशिक्षण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

पीजीआईएमएस, रोहतक के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अध्यक्ष प्रो. ध्रुव चौधरी ने अपने व्याख्यान में एथिक्स कमेटियों के मूल सिद्धांतों तथा आईसीएमआर दिशा-निर्देशों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि नैतिक मानकों का पालन गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय शोध के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बायो मेडिकल अनुसंधान में प्रतिभागियों की सुरक्षा, गोपनीयता और सूचित सहमति सुनिश्चित करना प्रत्येक शोधकर्ता की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शोध प्रस्तावों की निष्पक्ष समीक्षा, नियमित मॉनिटरिंग तथा पारदर्शिता को एथिक्स कमेटियों की प्रभावशीलता के प्रमुख तत्व बताते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।

मंच संचालन सेंटर फॉर बायोइनफॉर्मेटिक्स की निदेशक डॉ. महक डांगी ने किया। कार्यशाला संयोजक एवं जीव विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. मीनाक्षी वशिष्ठ ने स्वागत संबोधन किया।

कार्यशाला में चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की वैज्ञानिक- डॉ. सुजाता सिन्हा ने हेल्थ रिसर्च में नैतिकताः श्रेष्ठ प्रथाएं एवं नवीनतम अपडेट विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। इसके बाद एचईसी-एमडीयू के अध्यक्ष एवं संस्कारम विवि झज्जर के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. एम.सी. गुप्ता ने न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स रूल्स, 2019 पर अपने विचार रखे। अंतिम सत्र में पीजीआईएमएस रोहतक की प्रो. सविता वर्मा ने एडवर्स इवेंट मॉनिटरिंग के संदर्भ में जीसीपी विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों के साथ सार्थक संवाद एवं विचार-विमर्श हुआ।