एमडीयू में ब्लड, बग्स एंड बायोलॉजीः डिकोडिंग द एजिंग एक्सिस विषय पर व्याख्यान आयोजित

एमडीयू में ब्लड, बग्स एंड बायोलॉजीः डिकोडिंग द एजिंग एक्सिस विषय पर व्याख्यान आयोजित

रोहतक, गिरीश सैनी। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाली क्रॉनिक इंफ्लेमेशन और आंतों के माइक्रोबायोम में बदलाव स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं। उम्र बढ़ने के दौरान प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है और माइलॉयड कोशिकाओं की संख्या बढ़ने से माइलॉयड मैलिग्नेंसी जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। यह बात एस्ट्राजेनेका (यूके) के प्रिंसिपल साइंटिस्ट (ऑन्कोलॉजी रिसर्च) डॉ. अमित ग्रोवर ने कही।

एमडीयू के बायोकेमिस्ट्री विभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान में ब्लड, बग्स एंड बायोलॉजीः डिकोडिंग द एजिंग एक्सिस विषय पर बोलते हुए डॉ. ग्रोवर ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की एडाप्टिव इम्यूनिटी में गिरावट आती है। युवाओं की तुलना में बुजुर्गों में लिम्फोइड कोशिकाओं के मुकाबले माइलॉयड कोशिकाओं की संख्या अधिक हो जाती है, जिसका प्रतिरक्षा तंत्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ आंतों के माइक्रोबायोम की विविधता में भी बदलाव आता है। माइक्रोबायोम का बेहतर उपयोग इम्यूनोथेरेपी को प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। इम्यूनोथेरेपी टी-सेल्स को सक्रिय कर घातक बीमारियों से लड़ने में सहायक हो सकती है। उन्होंने कहा कि उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं में आनुवंशिक बदलाव और म्यूटेशन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रो. एनएस चौहान ने मुख्य वक्ता का परिचय कराते हुए व्याख्यान की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। इंटरैक्टिव सत्र में डॉ. अमित ग्रोवर ने फैकल्टी सदस्यों और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान प्राध्यापक प्रो विजय कुमार, प्रो रितू पसरीजा, डॉ संदीप सिंह, डॉ रश्मि भारद्वाज, प्रो सर्वजीत सिंह गिल, डॉ सपना शर्मा, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुख़र्जी सहित शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।