हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं में बढ़ रही जोड़ों की समस्या
रोहतक, गिरीश सैनी। शरीर के जोड़ों की सेहत खासकर महिलाओं की ओवरऑल वेलबींग का एक अहम हिस्सा है। महिलाएं रोजमर्रा के घरेलू कामों से लेकर प्रोफेशनल जिम्मेदारियां निभाने तक बिना महसूस किए अपने जोड़ों पर ज्यादा दबाव डालती रहती हैं और समय रहते इस पर ध्यान न देने के चलते ये धीरे-धीरे जॉइंट पेन, स्टिफनेस और मूवमेंट से जुड़ी समस्याओं में बदल सकता है।
ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप मलिक ने बताया कि महिलाओं में जोड़ों की समस्याओं का एक बड़ा कारण हार्मोनल बदलाव है। एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे-जैसे महिलाएं मेनोपॉज के करीब पहुंचती हैं, एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है और आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस और जॉइंट पेन का रिस्क बढ़ जाता है। इसी कारण कई महिलाओं को 40–50 साल की उम्र में घुटनों का दर्द, कमर दर्द या जकड़न महसूस होने लगती है।
उन्होंने बताया कि पोषण की कमी भी जोड़ों की समस्या की एक बड़ी वजह है। कई महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन न मिलने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और जॉइंट डैमेज व फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें भी जॉइंट हेल्थ को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि जॉइंट से जुड़ी कई समस्याओं को सरल लाइफस्टाइल बदलावों से रोका जा सकता है। नियमित लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, योग और स्विमिंग जोड़ों को लचीला बनाए रखते हैं और मसल्स को मजबूत करते हैं। कैल्शियम, विटामिन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी-इन्फ्लेमेटरी फूड्स से भरपूर बैलेंस्ड डाइट जॉइंट हेल्थ को बेहतर बनाते हुए सूजन को कम करने में सहायक है।
डॉ. कुलदीप मलिक ने कहा कि महिलाओं को जॉइंट पेन, सूजन, सुबह उठते समय जकड़न या मूवमेंट में दिक्कत जैसे शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और समय पर इलाज शुरू कर गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

Girish Saini 

