कैंसर के खिलाफ शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करती है इम्यूनोथेरेपीः डॉ. पीयूष
रोहतक, गिरीश सैनी। कैंसर के इलाज के क्षेत्र में लगातार आ रहे बदलावों में एक महत्वपूर्ण प्रगति इम्यूनोथेरेपी के रूप में सामने आई है। इम्यूनोथेरेपी शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर से लड़ने के लिए मजबूत और सक्रिय बनाता है। ये थेरेपी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने में मदद करती है।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. पीयूष बाजपेयी ने बताया कि सामान्य रूप से हमारा इम्यून सिस्टम संक्रमण और असामान्य कोशिकाओं से हमारी रक्षा करता है, लेकिन कैंसर कोशिकाएं अक्सर इम्यून सिस्टम से छिप जाती हैं। इम्यूनोथेरेपी दवाएं इन छिपी हुई कैंसर कोशिकाओं को फिर से पहचानने में मदद करती हैं।
डॉ. पीयूष ने बताया कि शुरुआत में इम्यूनोथेरेपी का उपयोग मुख्य रूप से एडवांस स्टेज के कैंसर में किया गया, जहां इसके अच्छे परिणाम सामने आए। खासतौर पर फेफड़ों का कैंसर, मेलेनोमा (स्किन कैंसर), ब्लैडर कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, हेड एंड नेक कैंसर और कुछ पेट व इसोफेगस (फूड पाइप) के कैंसर में इसका लाभ देखा गया। कुछ एडवांस कैंसर मरीजों में इस थेरेपी से कई वर्षों तक बीमारी को कंट्रोल में रखने में मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि अब इम्यूनोथेरेपी का उपयोग सर्जरी से पहले भी किया जाने लगा है। इससे ट्यूमर को पूरी तरह निकालने की संभावना बढ़ सकती है और कैंसर दोबारा होने का रिस्क कम हो सकता है। हालांकि इम्यूनोथेरेपी हर मरीज पर एक जैसा असर नहीं करती। इम्यूनोथेरेपी में आमतौर पर कीमोथेरेपी की तुलना में कम बाल झड़ते हैं और कम मतली होती है। लेकिन चूंकि यह इम्यून सिस्टम को सक्रिय करती है, इसलिए कभी-कभी यह शरीर के सामान्य अंगों पर भी असर डाल सकती है। इसके कारण दस्त, त्वचा पर रैश या खुजली, सांस लेने में तकलीफ, हार्मोन असंतुलन से थकान या वजन में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

Girish Saini 

