भारतीय ज्ञान परंपरा और तकनीक के मेल से निखरेगी उच्च शिक्षाः प्रो. राणा
रोहतक, गिरीश सैनी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बना सकता है। इसके लिए शिक्षकों को निरंतर चिंतन, विमर्श और नवाचार अपनाना होगा। यह बात एमडीयू के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणदीप राणा ने एमएमटीटीसी के दो-सप्ताहीय रिफ्रेशर कोर्स के उद्घाटन अवसर पर कही।
समुद्र मंथन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए भी निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने शिक्षकों से नवीन तकनीकों, डिजिटल माध्यमों और रचनात्मक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
एमएमटीटीसी की उपनिदेशिका डॉ. माधुरी हुड्डा ने बताया कि 24 अक्टूबर तक चलने वाले इस कोर्स में देशभर के 82 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। इसमें 25 से अधिक विशेषज्ञ 48 अकादमिक सत्रों में शिक्षण, अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और उच्च शिक्षा के नए आयामों पर विचार साझा करेंगे। पहले दिन डॉ. अंजू भारती और प्रो. आनंद शर्मा ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।

Girish Saini

