पूर्व सीएम हुड्डा का तंजः एचपीएससी का नाम बदलकर जीएचपीएससी (गैर-हरियाणवी पब्लिक सर्विस कमीशन) कर दे बीजेपी सरकार

एचपीएससी चेयरमैन को तुरंत बर्खास्त कर किसी हरियाणवी को चेयरमैन नियुक्त करने की मांग की।

पूर्व सीएम हुड्डा का तंजः एचपीएससी का नाम बदलकर जीएचपीएससी (गैर-हरियाणवी पब्लिक सर्विस कमीशन) कर दे बीजेपी सरकार

चंडीगढ़, गिरीश सैनी। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि नाम बदलने में माहिर बीजेपी सरकार को एचपीएससी का नाम भी बदल देना चाहिए। इसे बदलकर जीएचपीएससी (गैर-हरियाणवी पब्लिक सर्विस कमीशन) कर देना चाहिए, क्योंकि ये संस्था जानबूझकर हरियाणा की नौकरियां अन्य राज्यों के लोगों को दे रही है और एचपीएससी के पदों को खाली रखकर हरियाणा के युवाओं को उच्च पदों से वंचित रखने की साजिश रच रही है।

हुड्डा ने कहा कि एचपीएससी अब सिलेक्शन कमीशन की बजाय रिजेक्शन कमीशन बन चुका है। पिछले 11 साल से बीजेपी सरकार भर्तियों के नाम पर हरियाणा के युवाओं को ठग रही है। हरियाणा सरकार ने कृषि विभाग में एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (एडीए) के 100 पदों की भर्ती प्रक्रिया को साढ़े तीन साल बाद रद्द कर दिया।

उदाहरण देते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि वर्षों के इंतजार के बाद एचपीएससी पीजीटी कंप्यूटर साइंस की 1711 पदों की भर्ती का रिजल्ट आया, लेकिन सिर्फ 39 उम्मीदवार ही पास हुए, जबकि बाकी 1672 पद खाली रह जाएंगे। इससे पहले भी अनेक भर्तियों में पदों को खाली रखा गया है। एचपीएससी दरअसल, हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की बजाय गैर-हरियाणवी पब्लिक सर्विस कमीशन बन गया है, क्योंकि ज्यादातर चयन बाहर के युवाओं का हो रहा है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा के युवा यूपीएससी एवं अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर लेते हैं, लेकिन एचपीएससी सोची-समझी साजिश के तहत अपनी परीक्षाओं में इन्हें अयोग्य ठहरा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हरियाणा के युवा इतने अक्षम हैं कि वे भर्ती पेपर में पास होने जितने अंक भी नहीं ले पाए? हरियाणा के युवा आईएएस, आईपीएस बन रहे हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हरियाणा से हैं। सब जगह हम अपने प्रदेश के गौरव के झंडे गाड़ रहे हैं, तो ऐसा क्यों है कि एचपीएससी की नजरों में वे फेल हैं?

उन्होंने हैरानी जताई कि हमारे हरियाणा के बच्चे जो कि नेट, जेआरएफ टॉपर हैं, जो यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडलिस्ट हैं और कई सालों से उच्च पदों पर नौकरियां कर रहे हैं, वे एचपीएससी के असिस्टेंट प्रोफेसर के एग्जाम में 35 प्रतिशत अंक तक नहीं ला पा रहे हैं। हुड्डा ने बीजेपी सरकार द्वारा पहले भी कई भर्तियों में ऐसा खेल करने का जिक्र किया। पिछले दिनों अंग्रेजी असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में कुल 613 पोस्ट थीं, लेकिन इंटरव्यू के लिए सिर्फ 151 लोगों को बुलाया गया। यानी जनरल, एससी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस सभी की भर्तियों को यह सरकार खा गई।

इससे पहले भी विभिन्न भर्तियों में बड़े पैमाने पर पद खाली रखे गए हैं, जैसे एचसीएस एक्स बीआर की भर्ती में कुल 100 पदों में से केवल 61 भरे गए और 39 खाली रह गए। इसी तरह एडीओ एग्रीकल्चर की 600 पदों की भर्ती में सिर्फ 50 पद भरे गए, जबकि 550 पद खाली रह गए। पीजीटी म्यूजिक की 80 पदों की भर्ती में केवल 25 पद भरे गए और 55 खाली रह गए।

पीजीटी पोलिटिकल साइंस के 287 पदों में से 192 भरे गए और 95 खाली रह गए। लेक्चरर इलेक्ट्रिकल के 61 पदों में से 40 भरे गए और 21 खाली रह गए। लेक्चरर कंप्यूटर इंजीनियरिंग के 44 पदों में से 34 भरे गए और 10 खाली रह गए। लेक्चरर इंस्ट्रूमेंट के 17 पदों में से 8 भरे गए और 9 खाली रह गए। पीजीटी फिजिकल एजुकेशन एवं फाइन आर्ट्स के 1325 पदों की भर्ती में केवल 642 पद भरे गए, जबकि 683 पद खाली रह गए।

पूर्व सीएम हुड्डा ने मांग की है कि एचपीएससी के चेयरमैन को तुरंत बर्खास्त कर किसी हरियाणवी को चेयरमैन नियुक्त किया जाए। साथ ही, एचपीएससी को भंग करके तमाम भर्ती घोटालों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।