विवि बनने के बाद 12 साल में पहली बार सुपवा में टीचिंग स्टाफ की पदोन्नति का रास्ता साफ
ईसी की बैठक में सीएएस के तहत पदोन्नति देने के फैसले पर लगी मुहर।
रोहतक, गिरीश सैनी। कार्यकारी परिषद की वीरवार को हुई बैठक में दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक में कार्यरत टीचिंग स्टाफ को पदोन्नति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। ईसी की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगने के साथ ही विवि बनने के बाद 12 साल में पहली बार होगा, जब सुपवा के टीचिंग स्टाफ को पदोन्नति मिलने की शुरुआत होगी।
प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर विभाग के कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित ईसी की बैठक की अध्यक्षता कुलपति डॉ अमित आर्य ने की। बैठक में कुलसचिव डॉ गुंजन मलिक मनोचा, पूर्व वीसी प्रो राजबीर सिंह, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ अजय कौशिक, चीफ अकाउंट्स ऑफिसर विकास गुलिया मौजूद रहे। एसीएस फाइनेंस के प्रतिनिधि सुमेर यादव, एसीएस तकनीकी शिक्षा के प्रतिनिधि वाईपीएस बेरवाल, डीजी तकनीकी शिक्षा के प्रतिनिधि हरदेश कटारिया, वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश, काशी हिन्दू विवि से डॉ राजीव श्रीवास्तव, रमेश सिप्पी अकेडमी मुंबई से किरण जुनेजा सिप्पी ने बतौर ईसी सदस्य ऑनलाइन मोड में शिरकत की।
कुलपति डॉ अमित आर्य ने बताया कि यूजीसी की कैरियर उन्नयन योजना (सीएएस) के तहत सुपवा में मौजूद टीचिंग स्टाफ को पदोन्नति देने के फैसले को ईसी ने मंजूरी प्रदान की है। सीएएस के माध्यम से टीचिंग स्टाफ पदोन्नति के जरिए अपने करियर को आगे बढ़ा सकेगा। ये योजना शिक्षकों के प्रदर्शन और शिक्षा में उनके योगदान को देखते हुए डिजाइन की गई है। कुलपति डॉ आर्य ने बताया कि इसके तहत टीचिंग स्टाफ को विशिष्ट योग्यता मानदंडों को पूरा करना जरूरी है, जिसमें सेवा के वर्ष और शैक्षिक योग्यताएं शामिल हैं। मूल्यांकन प्रक्रिया में वार्षिक स्व-मूल्यांकन, पदोन्नति के लिए आवेदन, और स्क्रीनिंग सह मूल्यांकन समिति द्वारा अनुमोदन शामिल रहेगा।
कुलपति डॉ अमित आर्य ने बताया कि पदोन्नति मानदंड में व्यवस्था है कि अगर किसी शिक्षक को पिछले चार वर्षों में से कम से कम तीन वर्षों में संतोषजनक या अच्छा ग्रेड प्राप्त होता है और समिति पदोन्नति की सिफारिश करती है, तो उन्हें पदोन्नत किया जाता है। आवेदन मिलने के बाद पदोन्नति के लिए चयन प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसका संचालन एक समिति द्वारा किया जाता है जिसमें कुलपति, संबंधित संकाय के डीन, विभागाध्यक्ष और विषय विशेषज्ञ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि सीएएस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षकों को उनकी कड़ी मेहनत और अपने पेशे के प्रति समर्पण के लिए मान्यता व पदोन्नति मिले।

Girish Saini 

