उच्च शिक्षा में प्रभावी नेतृत्व और संस्थागत उत्कृष्टता जरूरी: प्रो. राज नेहरू
एफडीपी में विद्यार्थी-केंद्रित वातावरण विकसित करने और शिक्षकों को उचित मार्गदर्शन देने पर जोर
रोहतक, गिरीश सैनी। उच्च शिक्षा में संस्थागत उत्कृष्टता के लिए रणनीतिक सोच, नवाचार, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और प्रभावी नेतृत्व अनिवार्य हैं। शिक्षाविदों की भूमिका प्रशासन तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने और उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करने में भी है। यह बात मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट के महानिदेशक प्रो. राज नेहरू ने एमडीयू में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में कही।
एफडीसी एवं एमएमटीटीसी द्वारा आयोजित एक सप्ताह के कार्यक्रम लीडरशिप कॉम्पिटेंसीज फॉर एकेडेमिशियंस के छठे दिन प्रो. नेहरू ने अकादमिक नेतृत्व की बदलती भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने प्रभावी संवाद, ईमानदारी, निर्णय क्षमता और सहयोग की भावना को सफल नेतृत्व के प्रमुख गुण बताया। साथ ही, विद्यार्थी-केंद्रित वातावरण विकसित करने और शिक्षकों को उचित मार्गदर्शन देने पर जोर दिया।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत विकास के लिए शिक्षकों में नेतृत्व क्षमता, नवाचार और सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी हैं। कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नए नेतृत्व कौशल से सशक्त बनाते हैं। इस दौरान एफडीसी निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग, उपनिदेशक डॉ. माधुरी हुड्डा और प्रतिभागी शिक्षक मौजूद रहे।

Girish Saini

