राजस्व प्रशासन की समीक्षा के दौरान डीसी ने समयबद्ध सेवा वितरण और जवाबदेही पर जोर दिया

राजस्व प्रशासन की समीक्षा के दौरान डीसी ने समयबद्ध सेवा वितरण और जवाबदेही पर जोर दिया

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने मंगलवार को जिला राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली, प्रदर्शन एवं लंबित मामलों की समीक्षा के लिए एक व्यापक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में भूमि अभिलेख प्रबंधन, राजस्व न्यायालय, भूमि प्रशासन, नागरिक सेवाएं, डिजिटलीकरण पहल, अवसंरचना तथा मानव संसाधन सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों की विस्तार से समीक्षा की गई।

उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उपमंडलवार एवं तहसीलवार समीक्षा की गई, जिसमें एसडीएम, तहसीलदार तथा जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने प्रशासनिक सीमाओं के पुनर्गठन, उप-तहसीलों के सृजन तथा गांवों के पुनसंरेखण से संबंधित रिपोर्टों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में लंबित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा प्रभाव नागरिकों के दैनिक जीवन एवं संपत्ति अधिकारों पर पड़ता है, इसलिए किसी भी प्रकार की देरी या प्रक्रियागत चूक स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जवाबदेही, आपसी समन्वय तथा नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रगति की निगरानी के लिए नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जाएंगी।

उपायुक्त ने रोहतक, महम, सांपला, कलानौर एवं लाखनमाजरा तहसीलों में म्यूटेशन लंबित मामलों, जमाबंदी तैयारी तथा भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की स्थिति की समीक्षा की। प्रगति की सराहना करते हुए उन्होंने निर्धारित समय सीमा से अधिक, विशेषकर 60 दिनों से अधिक लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त की। क्षेत्रीय सत्यापन में देरी, पटवारियों की कमी, हैलरिस पोर्टल पर तकनीकी त्रुटियां, नागरिकों की आपत्तियां तथा जमाबंदी से जुड़े म्यूटेशन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे लंबे समय से लंबित म्यूटेशन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटान करें, आईटी टीमों के साथ समन्वय कर हैलरिस की त्रुटियों का समाधान करें, जमाबंदी की तैयारी एवं ऑनलाइन प्रकाशन निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार सुनिश्चित करें, खाना मालकियत एवं खाना काश्त की प्रविष्टियों में पूर्ण शुद्धता बनाए रखें ताकि भविष्य में विवाद न हों। उन्होंने हरियाणा लार्ज स्केल मैपिंग प्रोग्राम के अंतर्गत ड्रोन एवं रोवर सर्वे, ततिमा तैयारी तथा जीआईएस अद्यतन की प्रगति की भी समीक्षा की तथा राजस्व अभिलेखों के सुधार के उपरांत लंबित ततिमाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

उपायुक्त ने डीआरओ, एसडीएम, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार न्यायालयों में लंबित राजस्व मामलों की विस्तृत समीक्षा की। विभाजन, निष्पादन, बेदखली, स्टांप शुल्क तथा वरिष्ठ नागरिक मामलों की लंबित स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। बैठक में विभिन्न बिंदुओं पर विशेष तौर पर जोर दिया गया, जिनमें छह माह से अधिक समय से लंबित मामलों का शीघ्र निपटान, लंबे समय से लंबित विभाजन एवं निष्पादन मामलों की साप्ताहिक निगरानी, उच्च न्यायालय के आदेशों, सीडब्ल्यूपी एवं सीओसीपी की सख्त अनुपालना, समय पर शपथ-पत्र एवं अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करना शामिल है। उपायुक्त ने अनावश्यक स्थगनों से बचने तथा विधिक दृष्टि से टिकाऊ, गुणवत्तापूर्ण आदेश पारित करने के निर्देश दिए।

उपायुक्त ने सरप्लस भूमि, शरणार्थी भूमि, सरकारी भूमि एवं अतिक्रमण मामलों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमांकन के आधार पर बेदखली कार्यवाही शीघ्र पूर्ण की जाए, न्यायालयी कार्यवाही से पूर्व अद्यतन जमाबंदी एवं गिरदावरी अभिलेख सुनिश्चित किए जाएं, अतिक्रमण मामलों की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए, सरकारी एवं शरणार्थी भूमि की वापसी तथा बेदखली कार्यवाही की प्रगति की समीक्षा करते हुए जहां आवश्यक हो, वहां फील्ड स्तर पर कार्रवाई तेज करना शामिल है।

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं एवं अन्य अवसंरचना कार्यों से संबंधित भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा मामलों की समीक्षा भी की गई। अधिकांश मामलों में मुआवजा वितरण लगभग पूर्ण होने की जानकारी दी गई। न्यायालयी विवाद, शीर्षक संबंधी समस्याएं, उत्तराधिकार औपचारिकताएं अथवा अनुपस्थित भूमिधारकों के कारण लंबित मामलों पर चर्चा की गई तथा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे मामलों का सक्रियता से अनुसरण कर पात्र लाभार्थियों तक शीघ्र मुआवजा पहुंचाया जाए।

उपायुक्त ने मुख्यमंत्री विंडो, जन संवाद एवं सीपीग्राम्स सहित शिकायत निवारण प्रणालियों की एसडीएम एवं तहसील स्तर पर गहन समीक्षा की। उन्होंने एग्री स्टैक के अंतर्गत फार्म रजिस्ट्री, फसल पैटर्न मैपिंग, भूमि-किसान लिंकिंग एवं जियो-रेफरेंसिंग की प्रगति की समीक्षा की। तहसील एवं उप-तहसील कार्यालयों में अवसंरचना की कमी, विशेषकर पटवारी पदों की रिक्तियों सहित स्टाफ की स्थिति तथा आईटी अवसंरचना आवश्यकताओं की समीक्षा करते हुए अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, स्टाफ युक्तिकरण एवं हार्डवेयर प्रतिस्थापन से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक में हैरिस/हैलरिस फंडिंग, आईटी उपकरणों एवं डिजिटल साक्ष्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की गई तथा राज्य स्तर पर सक्षम प्राधिकरण के समक्ष लंबित मामलों का अनुसरण करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सांपला के एसडीएम उत्सव आनंद, रोहतक के एसडीएम आशीष कुमार, महम के एसडीएम विपिन कुमार, डीआरओ प्रमोद चहल, रोहतक के तहसीलदार यशपाल शर्मा, कलानौर के तहसीलदार दिनेश कुमार, रोहतक के नायब तहसीलदार दीपक व अन्य संबंधित तहसीलदार व नायब तहसीलदार मौजूद रहे।