डीसी सचिन गुप्ता ने सघन मॉनिटरिंग, निवारक स्वास्थ्य हस्तक्षेप और परिणाम आधारित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

डीसी सचिन गुप्ता ने सघन मॉनिटरिंग, निवारक स्वास्थ्य हस्तक्षेप और परिणाम आधारित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग की जिला स्तरीय व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांक, टीकाकरण कवरेज, उच्च जोखिम गर्भावस्था, गैर-संचारी रोग (एनसीडी), क्षय रोग नियंत्रण, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, आयुष्मान भारत योजना, वेक्टर जनित रोगों की तैयारी, विशेषज्ञ उपलब्धता तथा स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं का विस्तृत आकलन किया। समीक्षा बैठक के दौरान साक्ष्य आधारित योजना, निवारक हस्तक्षेप, डिजिटल मॉनिटरिंग तथा फील्ड स्तर पर जवाबदेही को मजबूत कर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल प्रशासनिक प्रक्रिया न रहकर परिणाम आधारित होनी चाहिए। हमारा फोकस निवारक स्वास्थ्य, समय पर पहचान और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग पर है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली रोग और डेंगू जैसी बीमारियों की रोकथाम हमारी प्राथमिकता है। सभी कार्यक्रमों में जवाबदेही और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जिला में सुदृढ़ मॉनिटरिंग, निवारक रणनीतियों, डिजिटल ट्रैकिंग और विभागीय समन्वय के माध्यम से रोहतक का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बन रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों की विस्तृत समीक्षा की गई। गत वर्ष 2025-26 के दौरान 281 शिशु मृत्यु तथा 12 मातृ मृत्यु दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 8.53 रही, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 14.97 रही, 5 वर्ष से कम आयु मृत्यु दर 16.76 रही तथा मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 71.59 रहा।

उपायुक्त ने कहा कि सभी सूचकांक हरियाणा के औसत से बेहतर हैं। उन्होंने कुल मृत्यु संख्या में वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु का विस्तृत ऑडिट किया जाए, रेफरल में देरी, कम जन्म वजन, नवजात जटिलताएं, निमोनिया, सेप्टीसीमिया तथा प्रसवोत्तर देखभाल की कमी जैसे कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए तथा ब्लॉक स्तर पर परिणाम आधारित हस्तक्षेप लागू किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील ब्लॉकों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए, साप्ताहिक समीक्षा की जाए व प्रसवोत्तर फॉलो-अप को मजबूत किया जाए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों की डिजिटल ट्रैकिंग की जाये, एनीमिया, उच्च रक्तचाप, गर्भकालीन मधुमेह आदि कारणों का विश्लेषण किया जाये तथा उच्च जोखिम गर्भावस्था वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जाये। उन्होंने कहा कि पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के तहत निगरानी सुदृढ़ की जाये। उन्होंने इसके तहत लापता गर्भधारण का बैक ट्रैकिंग, आशा, एएनएम व संस्थानों के आंकड़ों का मिलान व खुफिया आधारित कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिये।

उपायुक्त ने एफआरयू अर्थात फर्स्ट रेफरल यूनिट के संचालन का ऑडिट करते हुए कहा कि स्थानीय सिविल अस्पताल में 593 सिजेरियन, कलानौर में 56 सिजेरियन, सांपला 34 सिजेरियन व महम में 13 सीजेरियन करवाये गये। उन्होंने ऑपरेशन थिएटर, रक्त उपलब्धता, विशेषज्ञ तैनाती व आपात प्रसूति सेवाओं का ऑडिट करने के निर्देश दिए। उन्होंने जीवनशैली रोगों की स्क्रीनिंग व ‘स्वास्थ्य वाहिनी’ विस्तार की समीक्षा भी की।

उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य वाहिनी मोबाइल यूनिट्स कलानौर, कहानौर, मदीना, लाखन माजरा, चिड़ी, महम, सांपला व किलोई में सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि मई माह के दौरान शेष खंडों को कवर करना सुनिश्चित करें। इनसे ओपीडी, लैब टेस्ट, ईसीजी, एक्स-रे, एनसीडी स्क्रीनिंग व काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य व नशा मुक्ति अभियान की गति बढ़ाने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिकारी स्कूल व कॉलेजों में जागरूकता बढ़ाये तथा तनाव, चिंता व नशे पर परामर्श दें एवं युवाओं पर केंद्रित अभियान चलाये। उपायुक्त ने भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी को स्वास्थ्य अभियानों में जोडऩे, रक्तदान शिविर बढ़ाने व पोषण सहायता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने एचपीवी टीकाकरण कम होने पर स्कूल स्तर पर अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने टीबी उन्मूलन अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

उपायुक्त ने निर्देश दिए कि डेंगू की रोकथाम के लिए नगर निकाय स्तर पर फॉगिंग की निगरानी के लिए समितियां गठित की जाये। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि फॉगिंग व एंटी-लार्वा गतिविधियां शुरू की जाए, जलभराव क्षेत्रों की पहचान की जाए, साप्ताहिक हॉटस्पॉट मैपिंग की जाए तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाये।

उपायुक्त ने जिला में एनीमिया नियंत्रण पर मुख्य ध्यान देने के निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों को स्कूल, आंगनबाड़ी व एएनसी क्लीनिक के माध्यम से अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि लाभार्थियों की क्लेम प्रक्रिया की गति बढ़ाये तथा समय पर लाभ देना सुनिश्चित करें। उन्होंने स्वास्थ्य अवसंरचना व विशेषज्ञों के संदर्भ में भी जानकारी ली। उन्होंने एनेस्थेटिस्ट, सर्जन, इंटेंसिविस्ट व मेडिकल ऑफिसर के रिक्त पदों के संदर्भ में निर्देश दिये कि इस बारे में उच्चाधिकारियों को तुरंत अवगत कराया जाए तथा उपलब्ध स्टाफ का बेहतर उपयोग किया जाये। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र, बीपीएच व अस्पताल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर समय पर गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र, उपसिविल सर्जन डॉ. डिंपल, डॉ. संजीव मलिक, सर्जन डॉ. प्रतिभा, डीआईओ डॉ. अंजलि अरोड़ा, डॉ. विकास बालियान, डॉ. प्रीतेव, मनोचिकित्सक डॉ. विनिता सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।