डीसी सचिन गुप्ता ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर सभी लक्षित बच्चों व महिलाओं को कृमि नाशक दवा खिलाने के निर्देश दिए

रोहतक जिले में एक से 19 वर्ष के तीन लाख 78 हजार 944 बच्चे चिन्हित।

डीसी सचिन गुप्ता ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर सभी लक्षित बच्चों व महिलाओं को कृमि नाशक दवा खिलाने के निर्देश दिए

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 21 अप्रैल 2026 को जिला में सभी लक्षित बच्चों व महिलाओं को कृमि नाशक दवाई अवश्य खिलाई जाए। इस बार जिला में 1 से 19 साल तक के लक्षित 3 लाख 78 हजार 944 चिन्हित बच्चों एवं 20 से 24 साल की 29302 महिलाओं को कृमि नाशक दवाई खिलाई जाएगी। सभी विभाग राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग करें ताकि कोई भी बच्चा व महिला कृमि नाशक दवा लेने से वंचित न रहे।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के संदर्भ में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों को यह दवाई खिलाते समय ध्यान रखें कि कोई भी बच्चा खाली पेट न हो तथा मिड-डे-मील खिलाने के बाद ही बच्चों को यह दवा खिलायें। उन्होंने बैठक में संबंधित विभागों विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य विभागों को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के संदर्भ में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेट में कीड़े/कृमि होने की वजह से बच्चों में एनीमिया, भूख न लगना, पेट में दर्द की शिकायत रहती है। बच्चों में कृमि नियंत्रण से खून की कमी में सुधार होगा तथा पोषण स्तर बेहतर होगा।

उपायुक्त ने कहा कि  एक से 5 वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों तथा 6 से 19 वर्ष तक के बच्चों को सरकारी, अर्द्ध सरकारी तथा प्राइवेट स्कूलों में कृमि नाशक दवा खिलाई जाएगी। इस दिन 20 से 24 वर्ष की ऐसी विवाहित महिलाओं को भी दवाई खिलाई जाएगी, जो न तो गर्भवती है तथा न ही नवजात शिशु को स्तनपान करवा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृमि नाशक दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि 21 अप्रैल को किसी कारणवश कोई भी लक्षित बच्चा दवा की डोज लेने से वंचित रह जाता है, तो उसे 28 अप्रैल को मॉप अप डे पर यह दवाई अवश्य खिलाई जाए। एक से दो वर्ष के बच्चों को आधी टैबलेट पानी के साथ दें। इसी तरह 2 से 3 वर्ष के बच्चों को एक टेबलेट पानी में घोलकर पिलाएं तथा तीन से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों व किशोरों को एक टेबलेट चबाने को कहें।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत सभी बच्चों की स्क्रीनिंग करवाई जाये। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जाये कि ऐसी जांच के अधीन आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत सभी बच्चे उपस्थित रहे तथा सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच हो सके। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र, डीडीपीओ राजपाल चहल, जिला न्यायवादी सुरेंद्र पाहवा, डीईओ मनजीत मलिक, डीईईओ दिलजीत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी दीपिका सैनी, उप सिविल सर्जन टीबी डॉ. विकास सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।