योग के जरिए आत्म ज्ञान तथा विज्ञान से जुड़ेः प्रो. ए.एस. मान

भारतीय तपस्वी परंपराओं पर बहु-अनुशासनात्मक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी प्रारंभ।

योग के जरिए आत्म ज्ञान तथा विज्ञान से जुड़ेः प्रो. ए.एस. मान

रोहतक, गिरीश सैनी। भारत में यौगिक परंपरा के महत्व तथा भारतीय तपस्वियों की परंपराओं की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मंगलवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में भारतीय तपस्वी परंपराएं: पाठ्य सामग्री, रिवाज तथा दृश्य संस्कृति विषयक बहु-अनुशासनात्मक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी प्रारंभ हुई।

एमडीयू के दृश्य कला विभाग तथा यौगिक अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित की जा रही इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ एशियन एंड मिडल ईस्टर्न स्टडीज के संस्कृत के प्रोफेसर डा. जेम्स मैलिनसन ने हठ योग की प्रक्रिया एवं परंपरा बारे विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने भारत में नाथ संप्रदाय द्वारा हठयोग के प्रचलन की ऐतिहासिक जानकारी साझा करते हुए विशेष रूप से अमृत सिद्धि, दनात्रेय योगशास्त्र, गोरक्षशतक तथा हठ प्रदीपिका के विवरण तथा भारत के विविध स्थानों-स्थलों पर हठ योग संबंधित मूर्तियों का विवरण दिया।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि एमडीयू के डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. ए.एस. मान ने कहा कि यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी है। जरूरत है कि प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुडक़र भारत की कालजयी परंपराओं का अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि योग भारत के समृद्ध आध्यात्मिक-सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है। जरूरत है कि योग के जरिए आत्म ज्ञान तथा विज्ञान से जुडऩे का कार्य हम करें।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रतिष्ठित विद्वान व एमडीयू के यौगिक अध्ययन केन्द्र के निदेशक प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने स्वागत भाषण दिया और भारत में तपस्वी परंपरा तथा योग के गौरवशाली इतिहास बारे बताया। इस संगोष्ठी की आयोजन सचिव डा. अंजलि दूहन ने संगोष्ठी की थीम बारे बताया। उद्घाटन सत्र में मंच संचालन डा. प्रियंका यादव ने किया। आभार प्रदर्शनी शोधार्थी दीपांजली दयाल ने किया।

इस संगोष्ठी में जेएनयू, नई के प्रो. अखलाख अहमद अहान ने सूफी भक्ति काव्य के परिप्रेक्ष्य में अमीर खुसरो तथा कबीर की रचनाओं बारे व्याख्यान दिया। प्रो. बलबीर आचार्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसार योग का इतिहास एवं सिद्धांत बारे व्याख्यान दिया। प्रो. रश्मि मलिक ने तपस्वी परंपरा तथा पारिस्थितिकी बारे प्रस्तुति दी। प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने योगी महर्षि दयानंद सरस्वती के योगदान बारे बताया। नोएडा की डा. मानवप्रीत कौर अरोड़ा, पंजाब के डा. राजीव मैकमूलन, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के बेस्टिन हैरिस तथा लिस्बन की डा. डैनियला बैविलाक्वा ने भी अपनी शोध प्रस्तुतियां दी।

इस दौरान पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार, दृश्य कला विभागाध्यक्ष संजय कुमार, प्राध्यापक राजेश कुमार, हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णा जून, प्राध्यापक डा. कृष्णा देवी, डा. अनिल कुमार,  संस्कृत विभाग से डा. श्रीभगवान, डा. रवि प्रभात, डा. सुषमा नारा, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी व पीआरओ पंकज नैन समेत शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।