किसानों की समस्याएं जानने प्रदेशभर की मंडियों में जाएंगे कांग्रेस विधायक: पूर्व सीएम हुड्डा 

कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले। 

किसानों की समस्याएं जानने प्रदेशभर की मंडियों में जाएंगे कांग्रेस विधायक: पूर्व सीएम हुड्डा 

रोहतक/चंडीगढ़, गिरीश सैनी। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि गेहूं और सरसों की खरीद में किसानों को पेश आ रही दिक्कतों को जानने के लिए तमाम विधायक प्रदेशभर की मंडियों का दौरा करेंगे और किसानों की आवाज को उठाएंगे। 

बैठक में फैसला लिया गया कि मई माह में पार्टी पूरे प्रदेश में जिला स्तरीय बैठकें करेगी। इसके अलावा बैठक में नवनिर्वाचित राज्यसभा उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध ने समर्थन के लिए सभी विधायकों का धन्यवाद किया। 

पार्टी ने निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ चुनाव आयोग को लिखित शिकायत देने का फैसला लिया क्योंकि उन्होंने गलत तरीके से कांग्रेस विधायकों की वोट को कैंसिल की थी। साथ ही वोट कैंसिल के मामले को हाईकोर्ट में भी लेकर जाया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष रॉव नरेंद्र सिंह ने बताया कि क्रॉस वोटिंग को लेकर अनुशासन समिति की बैठक 3 अप्रैल को होगी । 

विभिन्न मुद्दो पर बोलते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी की रीति-नीति बन गई है कि वो हर बार किसानों को परेशान करने का नया तरीका ढूंढ़ लाती है। इस बार गेहूं खरीद के लिए नया नियम बनाया गया है कि ट्रैक्टर की नंबर-प्लेट की फोटो समेत किसानों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी होगा। इतना ही नहीं, किसान को वैरिफाई करने के लिए 3-3 गारंटर भी चाहिए होंगे। मानो ये अनाज मंडी नहीं बल्कि कोई हाई सिक्युरिटी जोन या जेल हो। 

हुड्डा ने कहा कि जल्द से जल्द और गेहूं की पूरी खरीद सुनिश्चित करने की बजाए, सरकार हमेशा खरीद में अड़ंगा लगाने की तरकीब निकालती रहती है। किसानों के लिए बायोमेट्रिक और गेट पर ही गेट पास काटने का नियम प्रैक्टिकल रूप से लागू करना असंभव है। क्योंकि जमींदार एक मेहनतकश वर्ग है, जिस वजह से बहुत से किसानों की उंगलियों के निशान तक घिस जाते हैं। कई बार बैंकों तक में उनकी उंगलियों के निशान मैच नहीं होते या फिर मैच करने में उनका समय लगता है। ऐसे में अगर यही काम मंडी के गेट पर होगा तो ट्रैक्टरों की लंबी लाइन लग जाएगी, जो जाम का कारण बनेगी। ज्यादातर जमीदार किराए के ट्रैक्टर लेकर मंडी आते हैं। अगर जाम की वजह से या वैरिफिकेशन में देरी की वजह से खरीद में देरी हुई तो ट्रैक्टर का किराया कौन देगा? जाहिर तौर पर ये बोझ किसान पर पड़ेगा और पहले से कर्ज में डूबे किसान को और आर्थिक नुकसान होगा। 

आढ़ती एसोसिएशन ने भी बताया है कि एक गेट पास बनाने में 10 से 15 मिनट का समय लग रहा है, जिससे एक दिन में सीमित संख्या में ही किसानों की ख़रीद प्रक्रिया पूरी हो सकती है। इससे आने वाले दिनों में और बड़ी अव्यवस्था की आशंका है।

हुड्डा ने मंडियों की व्यवस्था की ओर भी सरकार का ध्यान दिलवाते बायर कहा कि वो लगातार किसानों से बात कर रहे हैं। मंडियों में आज न बारदाना है, न तिरपाल. न लेबर, न किसानों के लिये कोई सहूलियत और न ही अबतक ट्रांसपोर्ट के टेंडर हुए हैं। ऐसे में जो फसल आएगी वो मंडियों में ही पड़ी रहेगी और उसका उठान नहीं होगा। और जब तक उठान नहीं होगा, तब तक किसानों की पेमेंट नहीं होगी। 

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर ये सरकार ऐसे हालात पैदा कर रही है कि किसान मंडी आना ही छोड़ दें। मंडी क्या, ये सरकार तो चाहती है कि किसान खेती ही छोड़ दें और इस सेक्टर को भी पूरी तरह पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दे।