स्वयं सहायता समूह से जुडक़र आत्मनिर्भर बनी महिला, कॉस्मेटिक व जूट बैग का व्यवसाय शुरू कियाः उपायुक्त सचिन गुप्ता

स्वयं सहायता समूह से जुडक़र आत्मनिर्भर बनी महिला, कॉस्मेटिक व जूट बैग का व्यवसाय शुरू कियाः उपायुक्त सचिन गुप्ता

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुडक़र महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि गांव लाखनमाजरा की आशा की सफलता इसकी प्रेरणादायक मिसाल है। वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से आई सीआरपी टीम ने अगस्त 2014 में उन्हें तथा आसपास की 11 महिलाओं को प्रेरित कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत श्री राम स्वयं सहायता समूह का गठन करवाया। समूह से जुडऩे के बाद मिशन द्वारा आयोजित विभिन्न क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर उन्हें नए कौशल सीखने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के बाद उन्हें एक वर्ष के लिए लाखनमाजरा गांव में गठित समूहों की देखरेख के लिए बतौर समूह सखी की जिम्मेदारी दी गई।

बतौर समूह सखी कार्य करते हुए मिशन द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने से उनके कौशल और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर प्राप्त हुए। कौशल प्रशिक्षण से प्रेरित होकर उन्होंने अपना स्वयं का कार्य शुरू करने का निर्णय लिया।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि सरकार की योजना के तहत स्वयं सहायता समूह ने उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए 1 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध करवाया। इस राशि से उन्होंने कॉस्मेटिक की दुकान शुरू की और इसके साथ-साथ जूट बैग बनाने का कार्य भी प्रारम्भ किया। पिछले तीन वर्षों से वह कॉस्मेटिक दुकान के साथ-साथ जूट बैग का कार्य भी कर रही हैं। भारत सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न सरस मेलों में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें जूट बैग की बिक्री के लिए स्टॉल उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। अब तक उन्हें 22 सरस मेलों में भाग लेने का अवसर मिला है। एक सरस मेले में 15-20 दिनों के दौरान औसतन लगभग 1 लाख रुपये के जूट बैग की बिक्री हो जाती है, जिससे खर्च निकालने के बाद अच्छी आय प्राप्त होती है।

इस कार्य से उनके परिवार को स्थायी आजीविका मिली है और अब उनके परिवार की मासिक आय लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक हो रही है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुडक़र उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ-साथ आत्मविश्वास और सम्मान भी मिला है। ये उदाहरण दर्शाता है कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिल रहे हैं और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।