सख्त गुणवत्ता नियंत्रण, सैचुरेशन प्लानिंग और निरंतर निगरानी के साथ रोहतक में ग्राम परिवर्तन को गति
डीसी सचिन गुप्ता ने विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रोहतक, गिरीश सैनी। रोहतक जिला प्रशासन ने समग्र एवं सतत ग्राम परिवर्तन की दिशा में अपने प्रयासों को और तेज कर दिया है। इस पहल में कार्यों की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे का पूर्ण सैचुरेशन, आर्थिक सशक्तिकरण तथा निरंतर फील्ड मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने स्थानीय कैंप कार्यालय में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के कार्यों की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास का आकलन फाइलों या आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले कार्यों से होगा - स्वच्छ गलियां, सुनिश्चित जल आपूर्ति और वास्तविक आजीविकाएं। सुविधाओं का सैचुरेशन और निरंतर निगरानी ही स्थायी बदलाव के सबसे मजबूत साधन होंगे।
उपायुक्त ने कहा कि निरंतर निगरानी, फील्ड में उपस्थिति और जवाबदेही ही ग्रामीण परिवर्तन की मूल शक्ति होगी।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि अब ग्रामीण विकास का मूल्यांकन केवल स्वीकृतियों या व्यय के आधार पर नहीं, बल्कि कार्यों की टिकाऊ गुणवत्ता, उपयोगिता और गांवों में दिखने वाले वास्तविक प्रभाव के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों के आरंभ से पूर्व, कार्यान्वयन के दौरान तथा पूर्ण होने के बाद—हर चरण पर सख्त गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में करवाए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता की नियमित रूप से जांच करवाने के निर्देश देते हुए कहा कि अगर विकास कार्यों की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी एवं अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाए।
उपायुक्त ने कहा कि विकास कार्य शुरू होने से पहले, विकास कार्यों के दौरान तथा विकास कार्य संपन्न होने पर जियो टैगिंग भी करवाई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि विकास कार्यों में प्रयोग होने वाली सामग्री के नमूने लेकर उनकी जांच करवाई जाए। उपायुक्त ने पंचायती विभाग के कार्यकारी अभियंता से ग्रामीण क्षेत्रों में करवाए जा रहे विकास कार्यों की रिपोर्ट प्राप्त की और आवश्यक दिशा निर्देश जारी किये।
उपायुक्त ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव का विकास कार्यों के लिए अनुमानित बजट भी तैयार किया जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट, कच्ची फिरनी, लाइब्रेरी, महिला संस्कृति केंद्र, इंडोर जिम, सामुदायिक केंद्र व योग व्यायामशाला आदि के बारे में दिशा निर्देश जारी किए। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के सशक्तिकरण का निर्देश देते हुए उपायुक्त ने कहा कि फास्ट फूड के कार्यों में रुचि रखने वाली महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें होटल प्रबंधन संस्थान से प्रशिक्षण दिलवाया जाए।
उन्होंने उन सभी सेप्टिक टैंक ऑपरेटर के लाइसेंस रद्द करने के भी निर्देश दिए, जो मल को निर्धारित स्थल पर खाली करने की बजाय खेतों अथवा हाईवे के किनारे पर डाल रहे हैं। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि एसटीपी वह आईपीएस पर आने वाले सभी सेप्टिक टैंक ऑपरेटर की एंट्री भी की जाए। उन्होंने कहा कि गोबरधन परियोजना के तहत गांव खरावड़ में परियोजना का कार्य पूरा हो चुका है और अब तक 36 कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। गांव मदीना कोरसान व बैंसी में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जा चुकी है। उपायुक्त ने इस कार्य में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने ठोस कचरा प्रबंधन शैड, तरल कचरा प्रबंधन और अमृत सरोवर चरण 2 के बारे में भी रिपोर्ट प्राप्त कर आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होंने विभिन्न मामलों में सरपंचों के विरुद्ध की जा रही जांच का कार्य भी पूरा करने के निर्देश दिए। इसके अलावा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, विधायक आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने ग्रामीणों से राज्य सरकार की 500 वर्ग गज तक शामलात भूमि पर 20 वर्ष से बने मकानों को नियमित करने की पॉलिसी का लाभ उठाने का भी आह्वान किया। इस योजना के तहत शामलात भूमि पर 20 वर्ष पहले बनाए गए 500 वर्ग गज तक के मकान को नियमित किया जा रहा है, बशर्ते यह मकान जोहड़ अथवा आम रास्ते पर ना हो। इस योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत अथवा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी को निर्देश दिए कि अगर कोई ग्रामीण इस योजना का लाभ नहीं उठाता तो अभियान चला कर शामलात की भूमि को कब्जा मुक्त किया जाए। इस दौरान अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला परिषद के सीईओ नरेंद्र कुमार, डीडीपीओ राजपाल चहल सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
Girish Saini 

