दोआबा कॉलेज में “भारतीय ज्ञान प्रणाली” पर कार्यशाला आयोजित 

दोआबा कॉलेज में “भारतीय ज्ञान प्रणाली” पर कार्यशाला आयोजित 
दोआबा कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में डॉ. श्रीकांत व डॉ. आनन्द प्रकाश उपस्थिति को सम्बोधित करते हुए । 

     जालन्धर, 14 फरवरी, 2026: दोआबा कॉलेज जालंधर की इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल द्वारा “भारतीय ज्ञान प्रणाली” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया ।  इसमें डॉ. श्रीकांत पी. कल्लूरकर, सलाहकार, रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज़ इन वैदिक साइंस, सोलापुर तथा डॉ. आनंद प्रकाश, NICMAR विश्वविद्यालय, पुणे बतौर कार्यशाला संचालन एवं रिसोर्स पर्सन उपस्थित हुए । रिसोर्स पर्सन का स्वागत करते हुए प्रि.  डॉ. प्रदीप भंडारी ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्धि से परिचित कराना तथा जीवन लक्ष्यों की प्राप्ति और व्यक्तित्व विकास में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोग से अवगत कराना है ।     
     डॉ. श्रीकांत ने अपने सत्रों में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य तथा व्यक्तित्व निपुणता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को वैदिक तकनीकों के माध्यम से लक्ष्य निर्धारण एवं व्यक्तित्व विकास के उपाय बताए। वर्कबुक अभ्यास के रूप में संबंध प्रबंधन, जीवन संतुष्टि, नेतृत्व क्षमता तथा व्यावसायिक संतुष्टि आदि विषयों पर गतिविधियाँ करवाई गईं । अतिचिंतन से बचने एवं मन को शांत रखने हेतु 20 सेकंड से 2 मिनट तक का “क्रिएटिव पॉज़” भी कराया गया । उनका सत्र आधुनिक चुनौतियों—जैसे शैक्षणिक दबाव, करियर लक्ष्य आदि—से निपटने के लिए तकनीकी-आर्थिक एवं नैतिक व्यक्तित्व निर्माण पर केंद्रित रहा ।
     डॉ. आनंद प्रकाश का सत्र जीवन संतुष्टि पर आधारित था । उन्होंने जीवन संतुष्टि का मॉडल प्रस्तुत करते हुए आजीवन सीखने, सार्थक नेटवर्किंग, भावनात्मक संतुलन आदि व्यावहारिक रणनीतियाँ साझा कीं। संवादात्मक चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने लक्ष्यों व मूल्यों पर चिंतन किया । प्रि. डॉ. प्रदीप भण्डारी, प्रो. आरती शर्मा एवं डॉ. निताशा शर्मा-संयोजकों ने दोनो वशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया ।  डॉ. निताशा शर्मा ने उपस्थिति का धन्यवाद किया। इस कार्यशाला में 85 प्रतिभागियों एवं स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया ।