दोआबा कॉलेज में "भारत और विश्व: वर्तमान समय में वैश्विक संबंधों की दिशा" पर पैनल चर्चा आयोजित

दोआबा कॉलेज में

जालन्धर, 29 अगस्त, 2025, दोआबा कॉलेज के पोस्ट ग्रैजुएट जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन विभाग द्वारा "भारत और विश्व: वर्तमान समय में वैश्विक संबंधों की दिशा विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया । जिसमें चन्द्र मोहन-वरिष्ठ पत्रकार, प्रधान आर्य शिक्षा मंडल एवं कॉलेज प्रबंधकीय समिति और सुरेश सेठ- प्रख्यात लेखक बतौर पैनलिस्ट शामिल हुए । गणमान्यों का हार्दिक स्वागत प्रि. डॉ. प्रदीप भंडारी, डॉ. सिमरन सिद्धू- विभागाध्यक्ष, प्रो. प्रिया चोपड़ा, बीएजेएमसी एवं एमएजेएमसी के विद्यार्थियों ने किया ।

चंद्र मोहन ने भारत के वैश्विक संबंधों में आने वाली जटिल चुनौतियों, विशेष रूप से अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर व्यापार तनाव पर प्रकाश डाला । ये तनाव राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं और चीन के रूस से बड़े तेल आयात के बावजूद चीन की तुलना में भारत को असमान रूप से प्रभावित करते हैं । उन्होंने पाकिस्तान को छद्म रूप में इस्तेमाल करने के कारण चीन पर भरोसा न करने की चेतावनी दी और मेक इन इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों पर ज़ोर दिया । एमएजेएमसी की छात्रा सिमरन ने कहा कि भारत आज अपने विभिन्न रक्षा से जुड़े हुए हथियारों एवं उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स सफलतापूर्वक बना रहा है जो कि मेकिंग इण्डिया के सिद्धांत को मजबूत करता है । इस पर  श्री चन्द्र मोहन जी ने भारत के अपने संसाधनों और प्रतिभा का लाभ उठाकर विदेशी रक्षा और प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करने की वकालत की, साथ ही सीमाओं और व्यापार में चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रति आगाह भी किया । छात्रा भूमिका ने पूछा कि आज़ादी के बाद भारत गुट निरपेक्ष नीति के तहत तटस्थ रहता था तो क्या आज के दौर में भी यह नीति प्रसांगिक है ? इस पर पैनेलिस्टों ने कहा कि आज के दौर के हिसाब से हमें इस नीति पर पुनः विचार करना पड़ेगा और देश के हित में जो भी सही हो उस पर मजबूत स्टेंड लेना होगा । 

सुरेश सेठ ने अमेरिका, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भारत के संबंधों के आर्थिक पक्ष पर चर्चा की। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प टैरिफ को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने में विश्वास करते हैं, लेकिन भारत अपने बड़े बाज़ार और आत्मनिर्भरता के कारण, ऐसी चुनौतियों से निपटने में सक्षम है । उन्होंने चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए वैश्विक दक्षिण देशों के बीच एकजुटता का भी आह्वान किया। सत्र के दौरान, छात्रों ने बढ़ते टैरिफ से निपटने की भारत की योजना, पाकिस्तान के लगातार आतंकवादी हमलों, मेक इन इंडिया अभियान की प्रगति और भविष्य, और क्या चीन पर सचमुच भरोसा किया जा सकता है, जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए।

प्राचार्य डॉ. प्रदीप भंडारी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत जिन विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है—चाहे वे व्यापार, कूटनीति या सुरक्षा के क्षेत्र में हों—उन्हें केवल बाधाओं के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए खुद को मज़बूत करने और सच्ची आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के महत्वपूर्ण अवसरों के रूप में देखा जाना चाहिए । इस मौके पर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, बीएजेएमसी एवं एमएजेएमसी के विद्यार्थी मौजूद थे । 

दोआबा कालेज में आयोजित पैनल डिस्कशन में चन्द्र मोहन, श्री सुरेश सेठ, प्रि. डॉ. प्रदीप भण्डारी और विद्यार्थी भाग लेते हुए ।