पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है, स्वास्थ्य पर भी खतराः एसडीएम अंकिता पुवार
रोहतक, गिरीश सैनी। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि तकनीक अपनानी चाहिए। यह बात सांपला की एसडीएम अंकिता पुवार ने गांव इस्माइला-11बी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कृषि विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता शिविर में कही।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से जैविक कार्बन बढ़ता है, मिट्टी के गुणों में सुधार होता है और नमी बनी रहती है। कृषि विभाग की ओर से सुपर सीडर, मल्चर और स्ट्रॉ बेलर जैसी मशीनों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की सहायता भी मिलती है।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि पराली जलाने से जहरीली गैसें निकलती हैं और मिट्टी के लाभकारी जीवाणु नष्ट होते हैं।
इस दौरान छात्राओं ने जागरूकता रैली निकालकर ग्रामीणों को पराली न जलाने का संदेश दिया। प्रश्नोत्तरी में विजेता छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। शिविर में 165 छात्राओं सहित स्कूल स्टाफ और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।

Girish Saini

