डिजिटल दौर में डिग्री नहीं, हुनर और सीखने की क्षमता दिलाएगी नौकरी
एमडीयू में रोजगार की बदलती जरूरतों पर मंथन, विशेषज्ञों ने तकनीकी दक्षता के साथ रचनात्मक सोच और टीम वर्क को बताया जरूरी
रोहतक, गिरीश सैनी। डिजिटल दौर में केवल डिग्री और तकनीकी ज्ञान नौकरी की गारंटी नहीं हैं। कंपनियां अब ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं, जो नई तकनीक सीखने, समस्याओं का समाधान खोजने और टीम के साथ काम करने में सक्षम हों। यह बात एमडीयू में आयोजित पैनल डिस्कशन में उद्योग विशेषज्ञों ने कही।
सीसीपीसी द्वारा राधाकृष्णन सभागार में करियर रेडीनेस इन द डिजिटल एजः व्हाट एम्प्लॉयर्स लुक फॉर विषय पर आयोजित चर्चा में रोजगार बाजार की बदलती अपेक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं पर मंथन हुआ।
कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने युवाओं को निरंतर सीखने, नवाचार और रचनात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को नौकरी तलाशने वालों तक सीमित रहने के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।
डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणदीप राणा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में तकनीकी दक्षता के साथ विवेक और निर्णय लेने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है।
पैनल में कॉग्निजेंट की तमासा मोहंती, एलेवेट्स के संस्थापक एवं सीईओ अभिनव जौहरी और नेलारा टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं सीईओ विकास जेरथ ने संवाद कौशल, व्यावहारिक अनुभव और समस्या समाधान को रोजगार के लिए अहम बताया। चर्चा का संचालन कामना जैन ने किया। सीसीपीसी निदेशिका प्रो. दिव्या मल्हान ने विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने का आह्वान किया।

Girish Saini

