यूएचएसआर में नवाचार पर मंथन, नए विचारों को मिलेगा ₹1 लाख तक का इनाम
सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज में विद्यार्थियों से शोध और तकनीक आधारित सुझाव आमंत्रित
रोहतक, गिरीश सैनी। पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि (यूएचएसआर) में शुक्रवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के अंतर्गत ई-टू-इनोवेट विषय पर आयोजित तकनीकी व्याख्यान में विद्यार्थियों को शोध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई।
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल पुस्तकों और शोध पत्रिकाओं तक सीमित रहना नहीं, बल्कि उसके निष्कर्षों को समाज के हित में लागू करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगिता में भाग लेकर नए विचार प्रस्तुत करने का आह्वान किया।
बतौर मुख्य वक्ता, एमडीयू के डीन (आर एंड डी), प्रो हरीश दूरेजा ने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं, दवा निर्माण और शोध के क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला रही हैं। उन्होंने रोबोटिक सर्जरी की संभावनाओं के साथ इसकी सीमाओं और चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ. मंजूनाथ बी.सी. ने बताया कि प्रतियोगिता में चयनित विचारों को जिला स्तर पर एक लाख रुपये तक का पुरस्कार मिल सकता है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार निर्धारित हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से जनहितकारी शोध एवं नवाचार संबंधी विचार ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने की अपील की।
मंच संचालन डॉ. उमेश यादव ने किया। इस दौरान कार्यकारी कुलसचिव एवं डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. एम.जी. वशिष्ठ, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर अत्री, कार्यकारी डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. अपर्णा परमार तथा पीजीआईडीएस की प्राचार्या डॉ. मनु राठी सहित विवि के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, विभागाध्यक्ष और विद्यार्थी मौजूद रहे।

Girish Saini

