सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को भावभीनी विदाई, अगले बरस फिर आने का आह्वान

ढाक की थाप और जयकारों के बीच संपन्न हुआ सर्वजनिन दुर्गा पूजा उत्सव, सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश

सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को भावभीनी विदाई, अगले बरस फिर आने का आह्वान

रोहतक, गिरीश सैनी। मॉडल टाउन स्थित कम्युनिटी सेंटर में आयोजित सर्वजनिन दुर्गा पूजा उत्सव विजयदशमी पर पारंपरिक पूजा-अर्चना और भावुक विदाई के साथ संपन्न हो गया। बंगाली समुदाय के श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलन तथा शंख ध्वनि के साथ आरती की और मां दुर्गा सहित देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की। 

उत्सव का प्रमुख आकर्षण सिंदूर खेला रहा, जिसमें सुहागिन महिलाओं ने लाल पाड़ वाली सफेद साड़ियों में एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की कामना की। मिष्ठान और पान अर्पित कर मां दुर्गा का वरण किया गया। ढाक की थाप, शंख ध्वनि और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने नम आंखों से देवी-देवताओं को विदाई दी। आसचे बच्छोर आबार होबे (अगले वर्ष फिर होगा) के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा।

मुख्य पुरोहित प्रशांतो गोस्वामी ने बताया कि हरियाणा में पहली बार उन्होंने पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाजों और विधि-विधान से दुर्गा पूजा संपन्न कराई। कोलकाता से विशेष रूप से दुर्गा पूजा में भाग लेने आई नीता राय ने सिंदूर खेला की परंपरा की जानकारी दी।

इस दौरान मुख्य आयोजक सोमेन बानिक, संरक्षक प्रो. एच.जे. घोष राय, एमडीयू के निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी, पुरोहित श्यामल गांगुली, मुंबई से आए साउंड डिजाइनर सुबीर दास सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। उत्सव ने सांस्कृतिक विविधता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।